बरेली, जेएनएन। CBSE 12th Result News Update 2021 : सीबीएसई व आईसीएसई की ओर से 12वीं के परीक्षा परिणाम को तैयार करने के लिए निकाले गए फार्मूले से छात्रों की बौद्धिक क्षमता का आंकलन करना उचित नहीं है। इस फार्मूले को लेकर एक्सपर्टों की राय एक है और न ही विद्यार्थियों की। कोई संक्रमण को देखते हुए इस निर्णय को छात्र हित में बता रहा है तो काेई इस निर्णय से भविष्य में छात्रों के समक्ष दिक्कत होने की आशंका जता रहा है। वहीं छात्रों में भी कई निर्णय से संतुष्ट तो कई उदास दिख रहे हैं।परीक्षा परिणाम तैयार करने के लिए बनाए गए फार्मूले के तहत एक से ज्यादा विषय में फेल होने पर कंपार्टमेंट परीक्षा देनी होगी। यह परीक्षा बोर्ड की ओर से मुख्य परिणाम जारी होने के बाद जारी होगी।

रिजल्ट फार्मूला चिंतनीय : मैट्रिक्स कैरियर अकादमी की सुगम अग्रवाल कहती हैं, जो रिजल्ट का फार्मूला कक्षा 12वीं के छात्रों के लिए सीबीएसई ने दिया है। वह एक बहुत चिंतनीय निर्णय है। चूंकि 12वीं के बाद जहां कुछ कालेज में दाखिला मेरिट के आधार पर होता है तो कहीं प्रवेश परीक्षा के माध्यम से। इसी तरह प्रतियोगी परीक्षाओं में बहुत सी परीक्षाएं ऐसी है, जहां मेरिट के आधार पर चयन होता है तो कहीं परीक्षा के आधार पर। लेकिन, अब जो तरीका बोर्ड ने दिया है वह सही नही है। क्योंकि इससे ऐसे बच्चों को सर्वाधिक फायदा होगा जिन्हें पढ़ाई से कोई मतलब नहीं होता। बोर्ड के डर से ही सही लेकिन, ऐसे छात्र कम से कम कुछ तो पढ़ाई करते थे। पर, अब वो भी नही करेंगे। मगर, जो बच्चे पढ़ाई में अच्छे हैं। उन्हें इसका भविष्य में इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। बोर्ड की परीक्षाएं उच्च शिक्षा व प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए एक आधार का काम करती हैं। इससे भविष्य में छात्रों के सामने काफी समस्याएं खड़ी हो सकती हैं, क्यूंकि शिक्षा का संबंध ज्ञान से होता है डिग्री से नहीं। 

परिस्थितिजन्य फैसला, फार्मूला उचित : चाणाक्य ट्यूटोरियल के निदेशक अशोक कुमार ने बताया कि संक्रमण की दृष्टि से सीबीएसई की ओर से 12वीं का परीक्षा परिणाम तैयार करने का फार्मूला ही उचित है। विषम परिस्थितियों में छात्रों का शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य सर्वोच्च प्राथमिकता है। सीबीएसई की नई मूल्यांकन नीति ने अंतहीन चर्चाओं व अटकलों को समाप्त कर दिया है। साथ ही छात्रों के लिए एक बड़ी राहत है। वहीं कई स्कूलों के प्रधानाचार्याें की राय के बाद सीबीएसई ने जो फार्मूला तैयार किया है। वो स्कूल और उच्च शिक्षा के बीच की खाई को पाटने का कार्य करेगा। जो वर्तमान माहौल के अनुसार अत्यंत आवश्यक है। वहीं अगर, जिन छात्रों को कम अंक प्राप्त होने पर संतुष्टि नहीं होती है तो वे स्थितियां सामान्य होने पर परीक्षा दे सकते हैं। इसके लिए बोर्ड ने छात्रों को विकल्प दिया है। ऐसे में छात्रों को असमंजस की स्थिति में नहीं होना चाहिए।

क्या कहते हैं विद्यार्थी : छात्र श्याम दीक्षित ने बताया कि सीबीएसई के इस फार्मूले से सहमत हूं। अगर परीक्षाएं होती तो और भी ज्यादा बेहतर अंक प्राप्त कर सकते थे। कोरोना के चलते ये फैसला छात्रों के हित में है। अभय शंकर सक्सेना का कहना है कि सीबीएसई का यह निर्णय छात्रों के लिए बेहतर है। लेकिन, परीक्षा के लिए पूरे साल मेहनत की थी। परीक्षा आयोजित होती तो खुद का आंकलन करने में दिक्कत न होती। सेही राज कहती हैं, मैं बोर्ड के इस निर्णय से सहमत नहीं हूं। आनलाइन पढ़ाई के दौरान तैयारी करने में काफी दिक्कतें आईं। इससे प्री बोर्ड में छात्रों का प्रदर्शन बेहतर नहीं भी हो सकता है। लेकि, बोर्ड परीक्षा में बेहतर कर सकते थे। युवराज सक्सेना बताते हैं कि यूनिट टेस्ट, अद्धवार्षिक और प्री बोर्ड में प्रदर्शन औसत रहा। लेकिन, बोर्ड परीक्षा के लिए तैयार थे। ऐसे में मैं आशा करता हूं कि परिणाम तैयार करते वक्त इस बिंदू को भी रखा जाएगा। 

Edited By: Samanvay Pandey