बरेली, जेएनएन। Bird Flu News :  बर्ड फ्लू की देश भर में स्थिति देखते हुए बरेली के केंद्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान में खास प्रजातियों (जर्म प्लाज्म) को सुरक्षित करने के लिए विशेष प्रयास हो रहे हैं। संस्थान में बायो सिक्योरिटी की व्यवस्था बढ़ाई गई है। जिसके तहत फार्म हाउस के टीनशेड ही नहीं मैदान पर भी रिफ्लेक्टर लगाए जा रहे हैं। चूनायुक्त जीवाणुरोधक रास्तों की संख्या और बढ़ाई जाएगी। इसके अलावा बाहर से आए किसान या अन्य को संस्थान के मुख्य द्वार पर ही रोक दिया जाएगा। सीएआरआइ निदेशक डॉ.ए के तिवारी खुद रोज एक बार संस्थान के संबंधित विज्ञानियों और जिम्मेदार अधिकारियों के साथ बायो सिक्योरिटी व्यवस्था की निगरानी करेंगे।

सालों की मेहनत से तैयार हुईं 14 खास प्रजातियां

गिनी फाउल में कादंबरी, चितांबरी, श्वेताबरी। बटेर में कैरी उज्जवल, कैरी श्वेता, कैरी ब्राउन, कैरी सुनहरी। मुर्गे-मुर्गी में कैरी प्रिया, कैरी सोनाली, कैरी देबेंद्र, कैरीब्रो विशाल, कैरीब्रो धनराज, कैरीब्रो मृत्युंजय, कैरीब्रो ट्रोपिकाना। टर्की में कैरी विराट। बत्तख में मोती, खुजी, खाकी कैंपबेल, व्हाइट पेकिन आदि नाम से प्रजातियों को विकसित किया गया है। ये ज्यादा अंडे और मांस उत्पादन के साथ हानिकारक तत्वों को शरीर तक कम पहुंचाती हैं। प्रजातियों को जलवायु के हिसाब से भी विकसित किया गया है।

सालों के शोध के बाद विकसित की प्रजातियों को सुरक्षित रखने के लिए बायो सिक्योरिटी शुरू कर दी है। इसकी कड़ी निगरानी भी हो रही। - डॉ.एके तिवारी, निदेशक, सीएआरआइ 

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