तीन दिन में डायबिटीज ठीक करने का दावा, बरेली में बिना लाइसेंस के नकली दवा विक्रेताओं का भंडाफोड़
बरेली में पुलिस ने नकली दवा बेचने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो फर्जी वेबसाइट और कॉल सेंटर के ...और पढ़ें

बिना लाइसेंस के नकली दवा विक्रेताओं का भंडाफोड़।
HighLights
बरेली में नकली दवा बेचने वाले गिरोह का भंडाफोड़, तीन गिरफ्तार।
फर्जी वेबसाइट से डायबिटीज तीन दिन में ठीक करने का दावा।
पुलिस ने 75 डिब्बे नकली दवाएं, मोबाइल, लैपटॉप जब्त किए।
जागरण संवाददाता, बरेली। साजिद इस्लाम और जफर ने रुपये कमाने के लिए लोगों की जिंदगी से ही खिलवाड़ करना शुरू कर दिया। अलग-अलग नामों से फर्जी कंपनियां बनाई और लोगों की बीमारियों का उपचार करने का दावा करने लगे। आरोपित शुगर जैसी बीमारियों को तीन दिन के भीतर जड़ से खत्म करने का दावा करते। लोगों से संपर्क करने के लिए एक फर्जी काल सेंटर और वेबसाइट भी तैयार की थी।
लोगों से बात करने के बाद उनसे दवाओं को आर्डर कराते और कोरियर कंपनियों से संपर्क कर लोगों को दवाएं सप्लाई कराते थे। पुलिस ने सूचना के बाद छापेमारी और 75 डिब्बे नकली दवाएं, मोबाइल और लैपटॉप बरामद किए हैं।
इन दवाओं की गुणवत्ता, मैन्यूफैक्चरिंग और एक्सपायरी भी संदिग्ध है। पूछताछ में आरोपित ने अपने गिरोह के दो और सदस्यों के नाम बताएं हैं। पुलिस अब उनकी तलाश में जुटी है।
शनिवार देर शाम पुलिस को सूचना मिली कि, सैलानी चौराहे स्थित यादगार रेस्टोरेंट के पास एक मकान में कुछ लोग नकली दवाओं का कारोबार कर रहे हैं। फर्जी कंपनियों और वेबसाइट की मदद से लोगों के पास तक मोटे दामों में वह दवाएं पहुंचाई जाती हैं।
पुलिस ने छापेमारी की तो मौके पर भोजीपुरा निवासी साजिद मलिक, एजाज नगर गौटिया निवासी इस्लाम और पशुपति बिहार निवासी मो. जफर मिले। मौके से लैपटाप, मोबाइल और 75 डिब्बों में दवाएं भरी हुई मिली। पुलिस ने उनसे दवाएं बेचने का लाइसेंस मांगा मगर उनके पास कुछ नहीं था।
पूछताछ में आरोपितों ने बताया कि वह फर्जी वेबसाइट के माध्यम से लोगों को अलग-अलग बीमारियों की दवाओं की सप्लाई करते हैं। इसके लिए उन्होंने आरके इंटरप्राइजेज, डियाबो-वीटा केयर, अयूर लाइफ और हमदम फार-ऐवर इंडिया जैसे नाम से फर्जी कंपनियां बनाई हुई हैं। जो लोग उनकी इन वेबसाइट से दवाएं ऑर्डर करते हैं उनके लिए वह डेलीवेरी, शैडोफैक्स, एक्सप्रेसवेस और ब्लू-डार्ट जैसी कंपनियों का इस्तेमाल करते हैं।
पुलिस ने मौके से सभी दवाएं, लैपटाप और मोबाइल बरामद कर आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपितों ने बताया कि उनके इस काम में रऊफ और रिजवान मियां भी शामिल हैं। रऊफ और साजिद सगे भाई हैं।
इंटरनेट मीडिया पर प्रचार कर फंसाते थे
पूछताछ में आरोपितों ने बताया कि वह अपनी दवाओं का इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रचार-प्रसार करते थे। तीन दिन में बीमारी का जड़ से खत्म करने का दावा कर लोगों को रिझाते थे। जो भी लोग उनकी वेबसाइट पर विजिट करते वह उनसे फोन कर संपर्क करते। उनका पता पूछकर उनसे वेबसाइट के माध्यम से ही दवाओं को आर्डर कराते और बाद में भेज देते थे। आरोपित कभी भी किसी को यह नहीं बताते थे कि उनकी कंपनी बरेली में है। बताते थे उनकी कंपनी उत्तराखंड की है।
एक हजार से 1450 रुपये तक थी कीमत
आरोपितों ने बताया कि उन्होंने अपनी किसी भी दवा की कीमत 1500 से अधिक नहीं रखी। सभी दवाओं की कीमत एक हजार रुपये से लेकर 1450 रुपये के बीच होती थी। जिससे लोग आसानी से उसे खरीद सकें और उन्हें मोटा मुनाफा हो। दवाओं की मैन्यूफैक्चरिंग, गुणवत्ता और एक्सपायरी भी संदिग्ध मिली।
सभी लोगों के थे अलग-अलग काम
पूछताछ में मुख्य आरोपित साजिद ने बताया कि उसने अपने भाई रऊफ और साथी पीलीभीत निवासी रिजवान मियां के साथ मिलकर फर्जी कंपनी बनाई थी। कंपनी में भी का काम अलग-अलग तय था।
दवाएं तैयार कराने और डिब्बों की पैकिंग का काम रऊफ और रिजवान देखते थे। इस्लाम कंपनी का टेक्निकल सपोर्ट देखता था। फेसबुक और इंस्टाग्राम पर शुगर की बीमारी के ठीक होने का प्रचार करता।
बारादरी पुलिस ने नकली दवा बेचने वाले तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया है। आरोपित फर्जी काल सेंटर के माध्यम से दवा सप्लाई करते थे। पूछताछ में उन्होंने अन्य लोगों का भी नाम बताया है। उनकी भी तलाश जारी है। -शिवम आशुतोष, एएसपी।
