बरेली, जागरण संवाददाता। Soap Businessman Deepak Gandhi Case Update : बरेली में साबुन व्यापारी (Soap Trader) दीपक गांधी की माैत से पर्दा उठ गया। महिला मित्र, उसके पति, साथी व बाल अपचारियों की लापरवाही के चलते दीपक गांधी की मौत हुई। महिला मित्र (Girl Friend)  के घर पर दीपक की तबीयत खराब हो गई। वह अचेत होकर गिर पड़े। काफी प्रयास के बाद भी जब दीपक ना उठे तो सभी को फंसने का डर सताया।

इसी के बाद आरोपित शव को कार में बंद कर ठिकाने लगा आए और भाग निकले। तीनों आरोपितों हितेश सक्सेना, हितेश की पत्नी महिला मित्र सपना सक्सेना व काजल शर्मा को पुलिस ने जेल भेज दिया। तीनों बाल अपचारियों को किशोर सुधार गृह भेजा गया।

पुलिस के मुताबिक, 18 सितंबर की शाम दीपक गांधी ने महिला मित्र सपना सक्सेना को फोन किया। फोन के करीब आधे घंटे बाद साढ़े पांच बजे वह सपना के घर राजीव इन्क्लेव पहुंच गए। इस दौरान सपना, पति हितेश सक्सेना, दो बाल अपचारियों व काजल शर्मा के साथ घर पर थी। काजल व दीपक एकांत में चले गए।

करीब 20 मिनट बाद काजल अचानक से चिल्लाई। सपना को आवाज देते हुए दीपक की तबीयत खराब होने की जानकारी दी। सपना, पति हितेश सक्सेना, दो बाल अपचारियों के साथ पहुंचे। दीपक नहीं उठे। इसी के बाद सभी डर गए। दीपक की हत्या में फंसने के डर से शव को ठिकाने लगाने की योजना बनाई।

पांचों में कोई कार नहीं चला पाता था जिसके बाद एक बाल अपचारी ने अपने दोस्त को फोन किया।उसे स्कूटी से लेकर घर आया। दीपक को कार में बैठाया गया। एक बाल अपचारी कार चला रहा था जबकि दूसरा साइड व तीसरा पीछे दीपक को पकड़े हुए था। कार बन्नूवाल नगर चिक्कर स्कूल के पास पहुंची।

यहां आस-पास सन्नाटा देखकर आरोपित उतर गए और कार बंद कर भाग खड़े हुए। पकड़े जाने के बाद आरोपितों ने पूरा घटनाक्रम स्वीकार कर लिया। एसपी क्राइम मुकेश प्रताप सिंह ने प्रेस कांफ्रेंस कर घटना का राजफाश किया।

यह था घटनाक्रम

18 सितंबर को प्रेमनगर के जनकपुरी निवासी साबुन व्यापारी दीपक गांधी (Deepak Gandhi) जरूरी काम बताकर घर से शाम पांच बजे निकले थे। देर रात तक वह नहीं लौटे तो स्वजन ने अगले दिन 19 सितंबर को प्रेमनगर थाने में उनकी गुमशुदगी लिखाई थी।

अगले दिन बन्नूवाल नगर चिक्कर स्कूल के पास दीपक का शव कार में पिछली सीट पर मिला था। पोस्टमार्टम के बाद विसरा सुरक्षित रखा गया था। बावजूद घटनास्थल अनहोनी की ओर अंदेशा कर रहे थे जिस पर मुहर लग गई।

304 की धारा में तरमीम की गई प्राथमिकी

गुमशुदगी के बाद प्राथमिकी को हत्या की धारा में तरमीम किया गया। घटना के राजफाश के बाद प्राथमिकी को धारा 304, 120बी व 201 में तरमीम किया गया। मतलब यह है कि आरोपितों की लापरवाही, षडयंत्र के चलते दीपक की जान गई। यदि वह समय रहते स्वजन को जानकारी देते। अस्पताल ले जाते तो उनकी जान बच सकती थी।

सीसीटीवी फुटेज से हुआ घटना का राजफाश

सीसीटीवी फुटेज (CCTV Footage) में शुरुआत में दीपक गांधी अकेले ही कार से जाते दिख रहे थे। अंतिम बार सपना को फोन करने पर उसके घर से घटनास्थल तक की सीसीटीवी फुटेज तलाशी गई तो पूरी कहानी ही साफ हो गई। आरोपित हितेश सक्सेना कार के आगे-आगे स्कूटी से चल रहा था।

कार में दीपक के साथ अन्य तीन बाल अपचारी भी बैठे दिख रहे है। वापसी में हितेश ही तीनों बाल अपचारियों संग स्कूटी से दिख रहा है। पता चला कि दीपक के पास एक ही मोबाइल था।

चार घंटे 45 मिनट सपना के घर पड़ा रहा शव

आरोपितों ने स्वीकार किया कि दीपक की मृत्यु छह बजे हो चुकी थी। शव ठिकाने लगाने की पूरी पटकथा व उसे घर से लेकर निकले में चार घंटे 45 मिनट का वक्त लग गया। इतने समय तक दीपक सपना के घर मृत अवस्था में पड़े रहे। रात 10.45 पर आरोपित उनका शव लेकर घर से निकले थे।

Edited By: Ravi Mishra