कलयुगी पति की दरिंदगी: बीमार पत्नी को चारपाई से बांधा, फिर तब तक दिया करंट, जब तक थम नहीं गईं सांसें
पति विनोद ने अपनी मानसिक रूप से कमजोर पत्नी सत्यवती को चारपाई से बांधकर बिजली के करंट से मार डाला। ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक चित्र
HighLights
वर्ष 2022 में नवाबगंज के चैना गांव की घटना, कोर्ट ने अब सुनाई उम्रकैद की सजा
जागरण संवाददाता, बरेली। पति-पत्नी के पवित्र रिश्ते और मानवीय संवेदनाओं को तार-तार कर देने वाले मामले में अपर सेशन जज-नौ अविनाश कुमार सिंह ने हत्यारे पति को उम्रकैद की सजा सुनाई है। घटना नवाबगंज थाना क्षेत्र के चैना गांव की है, यहां के निवासी विनोद ने अपनी मानसिक रूप से कमजोर पत्नी सत्यवती के साथ क्रूरता की सभी सीमाएं लांघ दीं।
अदालत के दस्तावेजों के अनुसार, एक और दो मई 2022 की रात को जब सत्यवती सो रही थी, तब विनोद ने बैलगाड़ी की रस्सियों से उसके हाथ-पैर चारपाई से कसकर बांध दिए और फिर बिजली के बोर्ड से एक एल्युमिनियम केबल जोड़कर उसे बार-बार करंट लगाया। वह दर्द से तड़पती रही, लेकिन पति का दिल नहीं पसीजा।
उसने तब तक करंट लगाया जब तक कि सत्यवती की सांसें नहीं थम गईं। अपने इस खौफनाक गुनाह पर पर्दा डालने के लिए शातिर विनोद ने हत्या में इस्तेमाल की गई रस्सी और केबल को छत पर फेंक दिया और रात के करीब दो बजे ही ईंट-भट्ठे पर काम करने चला गया ताकि एक झूठी कहानी रची जा सके।
अगली सुबह उसने मृतका के परिवार और पुलिस को यह कहकर गुमराह करने की कोशिश की कि उसकी पत्नी की दिमागी हालत ठीक नहीं थी और उसने खुद ही बिजली के नंगे तार पकड़कर जान दे दी है। हालांकि, मृतका के भाई संजीव को इस कहानी पर यकीन नहीं हुआ और प्राथमिकी लिखवा दी।
अदालत में सुनवाई के दौरान सच्चाई तब पूरी तरह से बेनकाब हो गई जब पोस्टमार्टम करने वाले डाक्टर फराज अनवर ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि मृतक महिला के शरीर पर अलग-अलग जगहों पर करंट लगने के जो गंभीर निशान पाए गए हैं, वे कोई भी इंसान खुद को कभी नहीं लगा सकता।
पुलिस जांच में विनोद की निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त रस्सी और तार भी बरामद हुए, जो इस खौफनाक साजिश की गवाही दे रहे थे। सरकारी वकील हरेंद्र राठौर ने नौ गवाहों को कोर्ट में पेश करके साबित किया कि विनोद अपनी पत्नी की बीमारी से परेशान होकर अक्सर उसे बेरहमी से पीटता था।
इसी के चलते आखिरकार उसने इस जघन्य हत्या को अंजाम दिया। मामले की गंभीरता और अपराध की क्रूरता को देखते हुए न्यायाधीश ने इसे एक बेहद निर्मम कृत्य माना। अदालत ने विनोद कुमार को हत्या दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। दोषी को 15 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
