गलतियों के पछतावे से कलम के सफर तक: सलाखों के पीछे गूंजा ककहरा, 50 बंदियों ने सुलेख प्रतियोगिता में दिखाया दम
बरेली जिला कारागार में अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस पर 50 बंदियों ने सुलेख प्रतियोगिता में भाग लिया। उन्होंने अपनी गलतियों को ...और पढ़ें

जिला कारागार में बंदियों को प्रतियोगिता की जानकारी देते जेल अधीक्षक आलोक शुक्ला। जागरण
HighLights
अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस पर सुलेख प्रतियोगिता में दिखाई प्रतिभा, हुए सम्मानित
हिमांशु अग्निहोत्री, बरेली। अज्ञानता के अंधेरे को चीरकर निकलने वाली शिक्षा की एक किरण इंसान की पूरी दुनिया बदल देती है। ऐसा ही अनूठा और प्रेरणादायक नजारा जिला कारागार में अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस पर आयोजित सुलेख प्रतियोगिता में देखने को मिला, जहां सलाखों के पीछे जिंदगी काट रहे बंदियों ने अपनी गलतियों के पछतावे को पीछे छोड़ कलम थामकर नए जीवन की खूबसूरत शुरुआत की है।
मात्र 28 दिनों की कड़ी मेहनत व बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से नियुक्त शिक्षक के मार्गदर्शन का कमाल है कि जो बंदी कभी अक्षरों से अनजान थे, वे ककहरा (प्राथमिक ज्ञान) पाकर सुलेख लिखने लगे हैं।
अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस के अवसर पर आयोजित एक विशेष कार्यक्रम ने यह साबित कर दिया कि सीखने और आगे बढ़ने की कोई उम्र या परिस्थिति नहीं होती। उल्लास कार्यक्रम के तहत जेल में बंद नवसाक्षर बंदियों के बीच मंगलवार को एक विशेष सुलेख प्रतियोगिता आयोजित की गई।
जब इन बंदियों को उत्तरपुस्तिका पर अब डर मत। अब पढ़ लिख। अनपढ़ मत रह। झगड़ा मत कर। भजन कर...जैसी पंक्तियां लिखने को दी गईं, तो उनके भीतर का छिपा हुआ एक नया इंसान बाहर आ गया।
जिन हाथों ने कभी अनजाने में गलत रास्ते चुने थे, आज वही हाथ कलम उठाकर पूरी शिद्दत से सुलेख उकेर रहे थे। प्रतियोगिता में 50 बंदियों ने उत्साह के साथ भाग लिया।
इस दौरान उनके चेहरों पर अतीत की गलतियों का गम और कुछ नया सीखने की बेइंतहा खुशी साफ झलक रही थी। पहले स्थान साहिल, दूसरा स्थान राशिद और तीसरा स्थान कृष्ण कुमार ने हासिल किया।
इन्हें फाउंडेशन अध्यक्ष अश्वनी कुमार भदौरिया, एबीएसए विजय कुमार, जेल अधीक्षक आलोक शुक्ला, पूर्व जेल अधीक्षक मोहम्मद अकरम, जेलर सुशील कुमार वर्मा ने प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया।
20 सितंबर को पहली बार परीक्षा देंगे बंदी
जिला कारागार में इन दिनों शिक्षा की एक अद्भुत अलख जग रही है। यहां महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों समेत कुल 50 बंदी प्रतिदिन सुबह पूरी लगन से कक्षा लेते हैं। उन्हें हिंदी, अंग्रेजी और गणित का मूलभूत ज्ञान दिया जा रहा है।
ये सभी 20 सितंबर को होने वाली मुख्य परीक्षा में पहली बार प्रतिभाग करेंगे। इसको लेकर बंदियों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा हैं। इस पूरी पहल को और अधिक प्रोत्साहन देने के लिए कोमल फाउंडेशन, गाजियाबाद की ओर से प्रतियोगिता के तीन सर्वश्रेष्ठ विजेताओं को सम्मानित भी किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव जया प्रियदर्शिनी, डिप्टी जेलर राघवेंद्र सिंह, सौमित्रदेव त्रिपाठी, वीरेश्वर प्रताप सिंह, शिक्षक संजीव गंगवार, देवदत्त, रीना कुमारी, राहुल मिश्रा आदि मौजूद रहे।
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