100 गज का अवैध मकान पड़ेगा महंगा! BDA की सलाह- स्वीकृत कॉलोनी में 30 गज का घर है ज्यादा फायदेमंद
बरेली विकास प्राधिकरण (BDA) ने अनियोजित विकास के खतरों और स्वीकृत कॉलोनियों के फायदों पर जोर दिया है। चीफ टाउन ...और पढ़ें

जागरण विमर्श में मुख्य नगर नियोजक अजय कुमार सिंह व अवर तकनीकी अभियंता राकेश शर्मा जागरण
HighLights
बीडीए के चीफ टाउन प्लानर अजय कुमार सिंह ने दी सुनियोजित विकास की मूलभूत जानकारी
बोले, मकान खरीदते समय जरूर लें नक्शा पास होने की जानकारी, वर्ना बाद में पछताना पड़ेगा
जागरण संवाददाता, बरेली। विकास प्राधिकरण से पास कालोनियों में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध रहती हैं, जबकि अनाधिकृत तरीके से विकसित कालोनियों के बाशिंदों को सड़क, बिजली, पानी और जलभराव की समस्या से जूझना पड़ता है। अनियोजित विकास को रोकना विकास प्राधिकरण की जिम्मेदारी तो है, लेकिन हमें भी सोचना पड़ेगा कि अवैध रूप से विकसित हो रही कालोनी में मकान न बनवाएं।
बरेली विकास प्राधिकरण के चीफ टाउन प्लानर अजय कुमार सिंह का कहना है कि अनाधिकृत कालोनी में 100 गज का मकान बनवाने से बेहतर बीडीए से स्वीकृत कालोनी में 50 गज का मकान बनवाना है।
सोमवार को उन्होंने जागरण विमर्श में शहर के सुनियोजित विकास के फायदे और अनियोजित विकास के दुष्प्रभाव की विस्तार से जानकारी दी। उनके साथ अवर तकनीकी अभियंता राकेश शर्मा भी रहे।
चीफ टाउन प्लानर ने बताया कि 100 वर्ग मीटर से कम क्षेत्रफल के आवासीय एवं 30 वर्ग मीटर क्षेत्रफल तक के व्यवसायिक मानचित्र आर्किटेक्ट से बनवाकर ‘फास्ट पास माड्यूल’ पोर्टल पर एक रुपये की टोकन राशि जमा कर सेल्फ सर्टिफिकेशन के जरिए स्वीकृत कराया जा सकता है।
विकास प्राधिकरण के बारे में बताया कि विकास क्षेत्र की सीमा का जिले की सीमा से कोई मतलब नहीं होता। एक प्राधिकरण में कई जिले आ सकते हैं और कई प्राधिकरण एक ही जिले में हो सकते हैं।
उदाहरण देकर समझाया कि बुलंदशहर विकास प्राधिकरण और खुर्जा विकास प्राधिकरण पहले एक ही जिले में थे। मास्टर प्लान की जानकारी देते हुए बताया कि शहर की जनसंख्या के अनुपात में आगामी दस साल के लिए मास्टर प्लान तैयार किया जाता है।
इसमें आवासीय, व्यवसायिक, कार्यालय और मूलभूत सुविधाओं का ध्यान रखा जाता है। इसी के आधार पर कितने क्षेत्रफल में भवन कितनी ऊंचाई तक बनेगा, शेडबैक के लिए स्थान निर्धारित करते हुए बिल्डिंग बायलाज के आधार पर प्राधिकरण द्वारा नक्शा पास किया जाता है।
भवन निर्माण के समय प्राधिकरण के इंजीनियर मानकों को परखते हैं, नियमों का उल्लंघन करने पर कार्रवाई की जाती है। अनियोजित विकास को लेकर उठाए गए सवाल का जवाब देते हुए बताया कि नक्शा पास कराकर कराकर भवन निर्माण कराना सुनियोजित विकास है।
जबकि बिना नक्शा पास कराए भवन का निर्माण कराना अनियोजित विकास है। अगर कोई बिल्डर कालोनी विकसित करता है तो उसे बीडीए से अप्रूवल लेने के लिए क्या करना चाहिए। इस सवाल का जवाब देते हुए चीफ टाउन प्लानर ने बताया कि आवासीय, व्यवसायिक, ट्रांसपोर्ट के लिए अलग-अलग मानक हैं।
15 प्रतिशत जमीन में पार्क विकसित करने के साथ सड़क, पेयजल, जल निकासी, विद्युतीकरण, वाटर रिचार्ज जैसी मूलभूत सुविधाओं के मानक पूर्ण कराकर कालोनी विकसित कराने की अनुमति ली जा सकती है।
उन्होंने कहा कि बरेली के सुनियोजित विकास की दिशा में कार्य किया जा रहा है ताकि यहां बाहर के निवेशक आकर निवेश करें और लखनऊ, दिल्ली की तरह शहर का विकास हो सके।
शहर में किला नदी की जमीन पर अवैध कब्जा कर किए गए निर्माण का सवाल उठने पर बताया कि नदियों के एक किनारे ही शहर विकसित हुए हैं, लेकिन बाद में नदी के दूसरी तरफ भी निर्माण कराने लगे।
यही स्थिति किला नदी पर रही है, अनाधिकृत तरीके से भवनों के निर्माण करा लिए गए हैं। प्रमुख नदियों के डूब क्षेत्र निर्धारित कराए जा रहे हैं, रामगंगा नदी का निर्धारण हो चुका है।
एक ही स्थान पर एक व्यक्ति नक्शा पास करके भवन का निर्माण कराता है, जबकि दूसरा व्यक्ति बिना नक्शा के ही मकान बनवा लेता है, उसे प्राधिकरण क्यों नहीं रोक पाता। इस सवाल पर उन्होंने बस इतना कहा कि प्राधिकरण में प्रवर्तन अधिकारियों की कमी इसका कारण माना जा सकता है।
