बरेली, जेएनएन। Ashada Month Gupt Navratri News : आषाढ़ मास शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 11 जुलाई से 18 जुलाई तक गुप्त नवरात्र मनाई जाएगी। इस बार गुप्त नवरात्रि की शुरुआत रवि पुष्य योग मे हो रही है, यह योग किसी भी पूजा पाठ का फल शीघ्र देने वाला होता है। ज्योतिष शास्त्र में इस योग का खासा महत्व है। इस योग में की गई साधना से यश, वैभव, धन ,संपदा की प्राप्ति बड़ी सरलता से होती है। गुप्त नवरात्रि में मां दुर्गा की पूजा को गुप्त रखा जाता है, इससे पूजा का फल दोगुना मिलता है।

गुप्त नवरात्रियों में मां भगवती की पूजा की जाती है। ज्योतिषाचार्य पंडित मुकेश मिश्रा बताते हैं कि गुप्त नवरात्रियों का महत्व चैत्र और शारदीय नवरात्रियों से ज्यादा होता है। आषाढ़ गुप्त नवरात्र को खासतौर से तंत्र-मंत्र और सिद्धि-साधना आदि के लिए बहुत ही खास माना जाता है। इस नवरात्र में व्यक्ति ध्यान-साधना करके दुर्लभ शक्तियों की प्राप्ति करते है। इस समय की गई साधना शीघ्र फलदायी होती है। इस नवरात्रि में मां आदिशक्ति की दस महाविद्याओं की पूजा का विधान है। गुप्त नवरात्रि तंत्र साधना करने वालों के लिए विशेष महत्व रखती है।

ये 10 महाविद्याएं साधक को कार्य सिद्धि प्रदान करती है

गुप्त नवरात्रि में मां की दस महाविद्याओं का पूजन और मंत्र जाप करके उनकी कृपा प्राप्त कर सकते हैं। इस दौरान मां की आराधना गुप्त रुप से की जाती है। इस दौरान देवी भगवती के साधक बेहद कड़े नियम के साथ व्रत और साधना करते हैं। इस दौरान लोग लंबी साधना कर दुर्लभ शक्तियों की प्राप्ति करने का प्रयास करते हैं। गुप्त नवरात्र में माता की शक्ति पूजा एवं अराधना अधिक कठिन होती है इस पूजन में अखंड जोत प्रज्वलित की जाती है।

घट स्थापना शुभ मुहूर्त

कलश स्थापना मुहूर्त- सुबह 05 : 31 मिनट से 07 : 47 मिनट तक

अभिजीत मुहूर्त- दोपहर 11 : 59 मिनट से 12 : 54 मिनट तक

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि

11 जुलाई - प्रतिपदा मां शैलपुत्री, घटस्थापना

12 जुलाई - मां ब्रह्मचारिणी देवी पूजा

13 जुलाई - मां चंद्रघंटा देवी पूजा

14 जुलाई - मां कुष्मांडा देवी पूजा

15 जुलाई - मां स्कंदमाता देवी पूजा

16 जुलाई षष्ठी- सप्तमी तिथि - मां कात्यानी मां कालरात्रि देवी पूजा

17 जुलाई अष्टमी तिथि - मां महागौरी, दुर्गा अष्टमी

18 जुलाई नवमी - मां सिद्धिदात्री, व्रत पारण

Edited By: Ravi Mishra