बरेली, जेएनएन। Badaun DM Inspection : बदायूं में लगातार फैलते जा रहे डेंगू की रोकथाम के लिए खुद जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी ने कमान संभाल ली है। एक दिन पहले सीडीओ ने बैठक में अधिकारियों को कसा तो अगले दिन डीएम और सीडीओ डहरपुर और गुलड़िया की स्थिति जानने के लिए मौके पर पहुंच गईं। यहां एसीएमओ डा. मंजीत सिंह, जिला मलेरिया अधिकारी समेत तमाम अधिकारी गैरहाजिर मिले। डीएम ने नाराजगी व्यक्त करते हुए सभी से स्पष्टीकरण तलब किया गया है। दैनिक जागरण ने इन दोनों जगहों के हालात को 15 और 16 अक्टूबर के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित की थी।

दातागंज ब्लाक के गांव डहरपुरकलां और नगर पंचायत गुलड़िया में डेगूं के बढ़ते मामलों का संज्ञान लेते हुए रविवार सुबह जिलाधिकारी दीपा रंजन ने मुख्य विकास अधिकारी निशा अनंत के साथ निरीक्षण किया। इस दौरान गांव के भीतर गंदगी और कूड़ा देख उन्होंने नाराजगी व्यक्त की और तत्काल हटवाकर सफाई कराने के निर्देश दिए। डीएम और सीडीओ ने ग्रामीणों से संवाद कर उनके हालचाल जाने। डेंगू की चपेट में आए लोगों के संबंध में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से जानकारी ली। उन्होंने निर्देश दिए कि गांवो में शिविर लगाकर जांच के लिए सैंपल लिए जाएं। मरीज पाए जाने पर गांवों की नालियों में एंटीलार्वा, दवा छिड़काव, फागिंग करवाई जाए।

डीएम ने मौके पर जाकर देखा तो डहरपुर कलां के ग्राम सचिव चंद्रभान सिंह, नगर पंचायत गुलड़िया में एसीएमओ डाॅ. मनजीत सिंह, जिला मलेरिया अधिकारी योगेश सारस्वत, एमओआईसी डाॅ. शीवेन्द्र अनुपस्थित मिले। डीएम ने नाराज़गी व्यक्त करते हुए स्पष्टीकरण व काराण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। डीएम ने कहाकि कहीं भी कोई अधिकारी, कर्मचारी द्वारा इस प्रकार की लापरवाही पाई गई तो कठोर कार्रवाई की जाएगी। सभी अधिकारी, कर्मचारी अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी जिम्मेदारी से करें। डीएम ने डेगूं और मलेरिया की रोकथाम के लिए उपाय बताते हुए कहा कि किसी भी प्रकार का जलभराव न होने दें, उसे समाप्त करें, जैसे गड्ढे में जलभराव है तो उस में मिट्टी डालकर उसे बंद कर दें। मच्छर से बचाव के लिए पूरी आस्तीन के कपड़े पहनना है। सभी व्यक्ति मच्छरदानी में सोएं।

प्रधान ध्यान रखें, ग्रामीण झोलाछाप के पास न जाएं

डीएम ने ग्राम प्रधान की जिम्मेदारी तय करते हुए कहाकि गांव में कोई भी व्यक्ति बीमार होता है तो झोलाछाप के पास न जाने दें। तत्काल अपने निकटतम स्वास्थ्य केन्द्र या जिला चिकित्सालय में इलाज कराएं। आशा तथा आंगनबाड़ी गांवों में जागरुकता अभियान चलाएं। सुनिश्चित करें कि मलेरिया पीवी एवं पीएफ के संक्रामक मरीजों को समय से दवाओं का सेवन करते रहें। स्वास्थ्य शिविर एवं जागरुकता के बारे में प्रचार होता रहे। स्वास्थ्य टीम के साथ सहयोग करें। कूलर एवं फ्रिज का पानी नियमित बदलते रहें।

Edited By: Ravi Mishra