जागरण संवाददाता, अमरोहा: शहर के तालाब लावारिस हो गए हैं। न पालिका उनका वारिस बनने के लिए तैयार है और न ही तहसील प्रशासन। दोनों एक-दूसरे को वारिस ठहराने में जुटे हैं। तहसील प्रशासन जहां तालाबों का कस्टोडियन नगर पालिका को बता रहा है। वहीं, अधिशासी अधिकारी पालिका इनकार कर रहे हैं। ये हाल तो तब है जब पालिका ने तालाबों का चयन अमृत सरोवर में किया है और शासन से करोड़ों की धनराशि उनके सौंदर्यीकरण के लिए मांगी है। 

अफसरों की इस रस्साकशी का फायदा दबंग उठा रहे हैं। तालाबों की जमीन पर कब्जा कर प्लाटिंग कर रहे हैं। न प्राथमिकी तहसील प्रशासन दर्ज करा रहा है और न ही पालिका। इस विवाद के चलते ही दबंगों के हौसले बुलंद हैं। 

तेजी से कब्जाई जा रही जमीन

नगर क्षेत्र में पनबाड़ी और कुशक तालाब हैं। पनबाड़ी करीब 56 बीघा में था जबकि कुशक 200 बीघा से अधिक में फैला है। पनबाड़ी की जमीन पर कब्जा कर दबंगों ने प्लाटिंग कर दी है। कुशक की जमीन को कब्जाने का कार्य भी तेजी से चल रहा है। दोनों तालाबों पर कब्जे में अभी तक किसी भी दबंग के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज नहीं कराई गई है। 

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की हो रही अवहेलना

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देश हैं कि तालाब चाहें निजी हो या फिर सरकारी, किसी का स्वरूप नहीं बदला जाएगा। लेकिन, शहर में तो सबकुछ बदल गया है। अधिकारियों की नजरों में दोनों तालाब लावारिस बन गए हैं। न उसे नगर पालिका परिषद अपना बता रही है और न ही तहसील प्रशासन। सवाल उठता है कि वारिस कौन है, इस पर जिम्मेदार एक-दूसरे के माथे पर ठीकरा फोड़ने में जुट गए हैं। उनका यही रवैया दबंगों के लिए फायदे का सौदा बना है। 

अधिकारियों के बोल

नगर पालिका के क्षेत्र में कुशक और पनबाड़ी तालाब आते हैं। दोनों तालाबों की कस्टोडियन पालिका है। तहसील प्रशासन ने उनको बाकायदा संपत्ति का रजिस्टर उपलब्ध कराया है। यदि तालाब को कोई कब्जा रहा है तो पालिका को प्राथमिकी दर्ज करानी चाहिए। कब्जा हटवाना चाहिए। तहसील प्रशासन इस कार्य में उसका सहयोग करेगा। लेखपाल की भूमिका संलिप्त है तो उस पर शिकायत के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। 

-भूपेंद्र कुमार, तहसीलदार।

सदर नगर पालिका अपनी संपत्ति की एनओसी देती है। पनबाड़ी व कुशक तालाब नगर पालिका के रिकार्ड में नहीं हैं, न ही पालिका कस्टोडियन है। तहसील प्रशासन ही उसको देखता है। कब्जे रुकवाने का काम तहसील प्रशासन का है। यह तालाब निजी बताए जा रहे हैं। तालाब हैं तो अमृत सरोवर के लिए चयन कर धनराशि की मांग की गई है ताकि, उनका सौंदर्यीकरण कराया जा सके।

-डा.ब्रजेश कुमार, ईओ नगर पालिका परिषद।

Edited By: Shivam Yadav

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