बरेली, जेएनएन। योग कई असाध्य बीमारियों में रामबाण है। इसकी नजीर रामपुर गार्डन की डा. आशा के रूप में मिलती है। मधुमेह से पीड़ित डा. आशा को इन्सुलिन का सहारा था। दवाएं भी लेनी पड़ती थी। तीन साल के योगा के बाद ऐसा फायदा हुआ कि इन्सुलिन की डोज से मुक्ति मिल गई। मधुमेह भी नियंत्रित हो गया।

डा. आशा सिंह को प्रतिदिन इन्सुलिन लेना पड़ता था। बढ़ता वजन और तनाव ने उन्हें परेशान किया। उन्होंने जीने की आस छोड़ दी थी। उन्हें एक मित्र ने मेडिटेशन की सलाह दी। लेकिन उन्हें ज्यादा फायदा महसूस नहीं हुआ। फिर उन्हें योग गुरु डा ब्रजेश गुप्ता के विषय में जानकारी हुई। तीन साल पहले उनके संपर्क में आयी। डा ब्रजेश ने पूरी हालात के बारे में जानकारी ली। इसके बाद उन्होंने बिना देर किए। उन्हें योगासन शुरू कराए। चूंकि इनकी इम्युनिटी पावर काफी कम थी। इसलिए पहले इन्हें प्राणायाम से शुरुआत की। तीन महीने अनुलोमविलोम चलता रहा। इससे इनका वजन कम हुआ। तनाव कम हुआ।

छह महीने में इन्सुलिन सप्ताह में तीन दिन लेने लगी

जब वजन कम हुआ। उसके बाद सूर्य नमस्कार, कपालभाती, मंडूकासन, भरिस्तिका कराया। इससे छह महीने में डाक्टर ने दवाइयों की डोज़ कुछ कम की। एक साल में इन्सुलिन लगभग खत्म हो गया। लगातार दो साल इन्होंने योगासन किया। बीच में तीन महीने छोड़ दिया। इन्हें फिर से परेशानी हुई। इस बीच कोविड पाजिटिव हुई। योगासन से ही इन्होंने कोरोना जंग जीती। अब मधुमेह की दवाएं बहुत कम हो गई। इनका कहना है योगासन मेरे लिए इन्सुलिन से कम नही। मैं अपील करती हूं। योगासन को दिनचर्या में शामिल करें। स्वस्थ रहे।

Edited By: Ravi Mishra