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    ‘जिंदा ठग, मरे हुए लाभार्थी’: जनसेवा केंद्र और सरकारी कर्मचारियों की मिलीभगत से चला करोड़ों का घोटाला

    Updated: Tue, 04 Nov 2025 07:21 PM (IST)

    बरेली में एक गिरोह मृतकों के फर्जी दस्तावेज बनवाकर सरकारी योजनाओं का पैसा हड़प रहा था। एसपी साउथ अंशिका वर्मा की जांच में खुलासा हुआ कि जनसेवा केंद्र ...और पढ़ें

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    जागरण संवाददाता, बरेली। जिले में मृतकों के फर्जी दस्तावेज बनाकर विधवा पेंशन, पारिवारिक योजनाओं का सरकारी धन हड़पने का गिरोह सक्रिय है। इस मामले की शिकायत उच्चाधिकारियों तक पहुंची तो एसपी साउथ अंशिका वर्मा ने इसकी स्वयं जांच की। इस गिरोह ने आंवला में कई मृतकों के फर्जी दस्तावेज बनवाए और करोड़ों रुपये का सरकारी धन हड़प लिया।

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    इसमें जन सेवा केंद्र संचालकों से लेकर कुछ सरकारी कर्मचारी भी शामिल हैं। जांच के बाद पुलिस ने आंवला थाने में नौ लोगों को नामजद करते हुए अज्ञात के विरुद्ध प्राथमिकी लिखी है। कुछ लोगों को पुलिस ने पूछताछ के लिए हिरासत में भी लिया है जल्द ही इस घटना का राजफाश होगा। इसके बाद आरोपितों की ठगी करने का पूरा तरीका सामने आ जाएगा।

    बारादरी थाना क्षेत्र के आकांक्षा एन्क्लेव निवासी यासमीन जहां ने कमिश्नर को शिकायती पत्र दिया। उन्होंने बताया कि, वह नारी शक्ति, नारी सेवा सम्मान समिति की अध्यक्ष होने के साथ ही एक समाज सेवी भी हैं। आरोप है कि उन्हें सूचना मिली कि पिछले कई महीनों से आंवला तहसील में फर्जी विधवा पेंशन व राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना में दलाल सक्रिय हैं।

    यह लोग गरीब लोगों के खातों से फर्जी तरह से रकम निकालकर ठगी करते हैं। आरोप लगाया कि इस गिरोह में हरीश कुमार, शांति स्वरूप, सौरभ, सुलदीप, मुनीष, भूरे, नीरज, धमदिवी, ऊषा देवी व कई अज्ञात लोग शामिल हैं। आरोप लगाया कि आरोपित एक-एक मृतक के दो-दो, तीन-तीन फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने के साथ ही उनके दो-दो फर्जी आधार कार्ड भी बनाते हैं।

    इसके बाद यह जन सेवा केंद्र संचालकों की मदद से मरे हुए लोगों के बैंक खातों से भी तमाम धनराशि निकाल लेते हैं। इस मामले में आंवला थाने में सभी आरोपितों के विरुद्ध प्राथमिकी पंजीकृत कर ली गई है।

    वर्ष 2018 में मृत्यु, अभी भी निकाल रहे थे रुपये

    यासमीन जहां ने कुछ उदाहरण देते हुए बताया कि आंवला के टांडा गौटिया निवासी जगन्नाथ की 21 जनवरी, 2018 में मौत हो गई थी। उनका खाता आंवला के स्टैट बैंक आफ इंडिया में खुला हुआ है। आरोप है कि जगन्नाथ की मौत के बाद भी आरोपितों ने उनके खाते से करोड़ों रुपये की धनराशि निकाल ली। आरोप है कि इनके अलावा भी कई ऐसे लोग हैं जिनकी मृत्यु के बाद भी उनके खातों को अभी भी सक्रिय किया हुआ है। उन खातों से लगातार रुपयों का लेनदेन किया जा रहा है।

    कोई बनता वकील तो कोई सरकारी अधिकारी

    यासमीन जहां का आरोप है कि आरोपितों ने अपना गैंग काफी बढ़ा कर लिया है। यह लोगों को ठगने के लिए अपने रूप भी बदल लेते हैं। आरोप है कि इस गिरोह का कोई सदस्य वकील बनता तो कोई सरकारी अधिकारी बनता हैं। पुलिस ने इस मामले में कुछ लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है। सरकारी धन को किस तरह से निकालते थे इसकी पूरी जानकारी जुटाई जा रही है।