जेएनएन, बरेली : सरकारी अस्पतालों में मंत्री, अफसरों के दौरे भी वसूली पर रोक नहीं लगा पा रहे। इस बीच एक और चौकाने वाला मामला सामने आया। प्रसव के बाद नवजात को मां की गोद में देने के बदले दो हजार रुपये की मांग की गई। जब तक रुपये नहीं मिले, स्टाफ ने बच्चा नहीं सौंपा। परेशान तीमारदार ने इसकी लिखित शिकायत की। कार्रवाई पर अधिकारी पल्ला झाड़ते नजर आ रहे।

गणेशनगर निवासी सुनील कुमार ने गर्भवती पत्नी नमिता को जिला महिला अस्पताल में भर्ती कराया था। एक दिसंबर को उन्हें बेटा हुआ। आरोप है कि जन्म के बाद स्टाफ ने बच्चे को अपने पास ही रखा। कहा कि मां की गोद में बच्चा तब मिलेगा जब दो हजार रुपये मिलेंगे। नमिता व उनके परिजनों ने गुजारिश की कि बच्चा तो दो, रुपये भी मिल जाएंगे। मगर, स्टाफ न पसीजा।

जब रुपये मिल गए, तब नमिता की गोद में बच्चा दिया गया। दंपती अस्पताल स्टाफ की हरकत से आहत हुए। चार दिसंबर को पत्नी को डिस्चार्ज कराने के दौरान सुनील ने शिकायत दर्ज कराई। पहले स्वास्थ्य मिशन की टीम को भी वसूली की शिकायत सुनने को मिली थी। बीते दिनों प्रभारी मंत्री श्रीकांत शर्मा व्यवस्थाएं सुधारने का निर्देश दे गए थे मगर वसूली पर लगाम नहीं लग पा रही।

 महिला के परिवार वालों से दो हजार रुपये लेने की कोई शिकायत हमारे पास नहीं आई। परिजन से शिकायत लेकर जांच कराएंगे। दोषी पाए जाने पर आरोपित के खिलाफ कार्रवाई होगी। -डॉ. अलका शर्मा सीएमएस, महिला अस्पताल 

Posted By: Abhishek Pandey

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