जेएनएन, बरेली : उच्च शिक्षा निदेशालय की ओर से सभी राज्य विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में मोबाइल फोन पर प्रतिबंध लगाने के आदेश को रुहेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अनिल शुक्ल व शहर के कुछ कॉलेजों के शिक्षकों ने जायज ठहराया है। सभी का एक स्वर में यही कहना है कि मोबाइल फोन के लगातार प्रयोग के चलते युवा बीमार और लाचार बन रहे हैं। कैंपस में मोबाइल फोन पर लगे प्रतिबंध को शिक्षक-छात्र कितना सही मानते और उसके क्या सकारात्मक परिणाम आएंगे, दैनिक जागरण ने यह जानने के लिए श्रंखला शुरू की है। इसी के तहत बुधवार को रुविवि के कुलपति सहित शहर के तमाम शिक्षकों से बातचीत की। पेश है एक रिपोर्ट...

40 फीसद छात्रों की पढ़ाई हो रही बर्बाद

कुछ दिन पहले डॉ. हेमा खन्ना ने 1500 छात्रों पर एक अध्ययन किया था। इसमें सामने आया कि मोबाइल के चलते 40 फीसद छात्रों की पढ़ाई बर्बाद हो रही है। मोबाइल का प्रयोग छात्रों को नशे के लत की तरह पकड़ रही है। 99 प्रतिशत छात्र-छात्राएं रोजाना मोबाइल कॉलेज में लेकर आते हैं।

शासन की यह पहल सकारात्मक है। इससे कक्षाओं में पठन-पाठन का माहौल बनेगा। ऑर्डर की कॉपी मिलते ही इसे विश्वविद्यालय समेत सभी महाविद्यालयों में लागू कर दिया जाएगा।

प्रो. अनिल शुक्ल, कुलपति रुहेलखंड विश्वविद्यालय

मैंने तो पहले से ही कॉलेज में मोबाइल फोन पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर ली थी। बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं कक्षाओं में मोबाइल फोन का बेधड़क प्रयोग करते रहते थे। इससे उनकी पढ़ाई तो प्रभावित होती ही थी साथ में कई तरह की बीमारियां भी होने लगी हैं। छात्र कुछ सोचने समझने की बजाय केवल मोबाइल पर ही आश्रित होते हैं। इससे उनमें शोध करने की क्षमता खत्म हो गई है।

डॉ. अनुराग मोहन, प्राचार्य बरेली कॉलेज, बरेली

स्कूल और कॉलेज में मोबाइल का प्रयोग काफी तेजी से बढ़ रहा था। इसके प्रयोग के चलते कई तरह के अपराध भी होते हैं। छात्र मानसिक तौर पर बीमार हो रहे हैं। अवसाद में आने का कारण भी यही है। स्कूली बच्चे लगातार मोबाइल में गेम खेलते हैं। इससे उनके आंखों पर दुष्प्रभाव पड़ रहा है।

डॉ. हेमा खन्ना एसोसिएट प्रोफेसर, बरेली कॉलेज 

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