बरेली, जागरण संवाददाता। Bilkis Bano Case: वर्ष 2002 में हुए गुजरात दंगों में सामूहिक दुष्कर्म पीड़िता बिलकिस बानो ( Bilkis Bano) के 11 सजायाफ्ता मुजरिमों को रिहा कर दिया है। ऐसा करके गुजरात की भाजपा हुकूमत ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह मुसलमानों को किसी तरह का इंसाफ हासिल नहीं करने देगी। इन गुनाहगारों को रिहा करना असल में हैवानियत का समर्थन करना है। यह कहना है कि दरगाह आला हजरत (Dargah Aala Hazrat) से जुड़े और आल इंडिया रजा एक्शन कमेटी (आरएसी) के नायब सदर मौलाना अदनान रजा कादरी का।

अदनान रजा ने कहा कि गुजरात की हुकूमत के इस निर्णय से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के उस बयान की भी पोल खोल दी है, जो उन्होंने लाल किले की प्राचीर पर खड़े होकर महिलाओं के सम्मान के बारे में दिया था। इसके बाद भी उन्होंने या अन्य किसी भी बड़े भाजपा नेता ने गुजरात हुकूमत के इस शर्मनाक फैसले की निंदा नहीं की है।

उन्होंने कहा कि गुजरात में कैदियों को रिहा करने के जो मौजूदा नियम हैं, उनके मुताबिक भी बिलकिस बानो के गुनाहगारों को रिहा नहीं किया जा सकता था। उन्होंने कहा कि जेल से रिहा होने के बाद गुनाहगरों का स्वागत करने की भी निंदा नहीं की गई। इससे दरिंदों के हौसले और बढ़ेंगे और वे अल्पसंख्यकों पर और भी जुल्म ढहाएंगे।

जानें कौन हैं बिलकिस बानो

वर्ष 2002 में हुए गुजरात दंगों की सामूहिक दुष्कर्म पीड़िता बिलकिस बानो के पूरे परिवार को उनकी आंखों के सामने मार डाला गया था। इस मामले में आरोपितों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करने के बाद उन्हें सजा भी सुनाई गई थी। दोषियों की रिहाई पर बिलकिस बानों ने दुख जताया है।

न्यायपालिका से जताई कार्रवाई की उम्मीद

अदनान मियां ने कहा कि इन हालात में देश की न्यायपालिका से उम्मीद की जानी चाहिए कि वह कड़ी कार्रवाई कर नजीर पेश करेगी, जिससे समाज को बांटने, लड़वाने और नफरत के बल पर राज करने वालों को सबक मिले।

Edited By: Vivek Bajpai

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