जेएनएन, बरेली :  पीलीभीत बाईपास पर ग्रीन बेल्ट में अवैध रूप से बनी कॉलोनी पर शनिवार को बुलडोजर चला। बरेली विकास प्राधिकरण ने मुड़िया अहमदनगर में कई बीघा अवैध निर्माण पर कार्रवाई करते हुए निर्माणाधीन मकानों को सीलबंद भी किया। मामला कमिश्नर की कोर्ट में वर्ष 2013-14 से लंबित था। जिस पर कमिश्नर ने फैसला प्राधिकरण के पक्ष में सुनाया। जिसके बाद शनिवार को पुलिस और प्रशासन की मौजूदगी में कार्रवाई हुई।

बरेली विकास प्राधिकरण की टीम मुड़िया अहमदनगर में 20 बीघा जमीन पर बनी अवैध कॉलोनी पर पहुंची। हाईटेक सिटी ने यहां वर्ष 2013-14 से पहले प्लॉटिंग की थी। जिसके बाद अब करीब आधा दर्जन मकान बन चुके थे। वहीं, कई मकान निर्माणाधीन थे। जिन मकानों का निर्माण चल रहा था उसे बीडीए अधिकारियों ने मौके पर ही सील कर दिया। वहीं, कॉलोनी में बनी सड़कों, खंभे और दीवारों को बुलडोजर की मदद से गिराया गया। जिन मकानों में रिहाइश उन्हें मिली मोहलत दे दी गई है।

पांच साल में खारिज हुई अपील: दरअसल, हाईवे किनारे मुड़िया अहमदनगर में जहां अवैध प्लॉटिंग हुई। उस जगह को महायोजना में ग्रीन बेल्ट दिखाया गया है। बीडीए ने नोटिस व अन्य कार्रवाई करने के बाद 12 मार्च 2014 को ध्वस्तीकरण के आदेश दिए थे। हालांकि इसके खिलाफ विकासकर्ता ने मंडलायुक्त न्यायालय में ध्वस्तीकरण आदेश रद करने की अपील की थी। लगभग पांच साल बाद मार्च 2019 में कमिश्नर ने ध्वस्तीकरण आदेश बहाल कर दिया। जिसके बाद शनिवार को कार्रवाई हुई।

आॅनलाइन दिखेगी गांवों की जमीन: बरेली विकास प्राधिकरण (बीडीए) के क्षेत्र में शामिल 264 गांवों की जमीन की सारी जानकारी ऑनलाइन देखी जा सकेगी। बीडीए ने महायोजना-2031 बनने से पहले इसकी तैयारी शुरू कर दी। ऑनलाइन डिटेलिंग के लिए लखनऊ स्थित शासकीय रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर (आरएसएसी) ने काम शुरू कर दिया है। इसके लिए बीडीए ने दो लाख रुपये फीस भी जमा करा दी है।

तहसीलवार निकलवा रहे नक्शा: प्राधिकरण क्षेत्र में अधिकतर गांव सदर तहसील के हैं। इनमें कई गांवों का नक्शा बीडीए के पास नहीं था। बीडीए तहसीलवार गांवों का नक्शा जुटा रहा है। अब आरएसएसी को गांवों के सजरा प्लान भेजे जा चुके हैं, जिन पर काम शुरू हो गया है।

धोखाधड़ी से बच सकेंगे आमजन : बीडीए के चीफ टाउन प्लानर आशीष शिवपुरी बताते हैं कि सभी गांवों का सजरा प्लान सुपर इंपोज होने के बाद जमीनों की धोखाधड़ी रुकेगी। कोई बिल्डर या किसान कृषि योग्य जमीन को आवासीय दिखाकर धोखे से नहीं बेच पाएंगे। खरीदार प्राधिकरण की वेबसाइट पर जमीन की माप, मालिक, प्रकृति, उपयोग सभी विवरण देख सकेंगे।

 264 गांवों की जमीन की ऑनलाइन डिटेलिंग हो रही है। इन गांव की जमीन का रिकॉर्ड ऑनलाइन मिल जाएगा। लखनऊ की कंपनी को नक्शों का ब्योरा तैयार करने का काम सौंप दिया है। - अंबरीश श्रीवास्तव, सचिव, बीडीए

Posted By: Abhishek Pandey

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