शांत शुक्ला, बरेली : देश 71वां गणतंत्र दिवस मना रहा है।गणतंत्र का असली मतलब उन लोगो से है जो इस देश के तंंत्र में गण बनकर अपनी भूमिका निभा रहे हैं और समाज के साथ साथ सरकार को भी आईना दिखा रहे हैं। मीरगंज में रामगंगा के गोरा बसंतपुर घाट पर लोगों की परेशानी को देखते हुए बसपा सरकार में पुल बनाने का निर्णय लिया गया था। काफी जद्दोजहद के बाद पुल बनना शुरु भी हो गया।लेेकिन बीच में अटक गया। ऐसे में लोगो ने सरकार का मुंह ताकने की बजाए खुद ही लकड़ी का पुल तैयार कर अपनी समस्या का समाधान कर लिया। 

तकनीकि सिस्टम ने अटकाया रोड़ा: लोगों को उम्मीद लगने लगी थी कि अब पुल बनने से न सिर्फ उन्हें आने जाने में आसानी हो जाएगी बल्कि मीरगंज और आंवला क्षेत्र के आपस में जुड़ जाने से सहूलियत भी हो जाएगी। लोगों की उम्मीदें जल्द ही धूमिल होने लगी, क्योंकि सरकारी सिस्टम और तकनीकी पेंच की वजह से पुल का निर्माण बीच में ही अटक गया। शासन प्रशासन जानकर भी अनजान बना हुआ था।

मुंह ताकने की बजाय खुद लिया फैसला : ऐसे में लोगों ने सरकार का मुंह ताकने की बजाय खुद ही इस समस्या का समाधान करने की ठानी। लोगों ने तय किया कि जब तक पक्के पुल का निर्माण नहीं हो जाता, तब तक वह खुद ही लकड़ी का पुल बनाकर आंवला और मीरगंज तहसील के क्षेत्र के लोगों को आने जाने का रास्ता मुहैया कराएंगे। इस काम में लोग जुट गए। सबने अपने अपने संसाधनों से पहले लकड़ी और बल्लियों का जुगाड़ किया।

कील और रस्सी के इंतजाम के लिए किया चंदा : लोगों ने चंदा करके पुल के लिए जरुरत कील रस्सी का इंतजाम किया का इंतजाम किया। कुछ दिनों में यह पुल तैयार हो गया। अब इस पुल से आंवला और मीरगंज क्षेत्र की जनता आवाजाही करती है। बहरौली के राजीव गंगवार कहते है कि इस पुल के बन जाने से बहुत आराम हो गया। पुल से बाइक, साइकिल सवार और पैदल यात्री आवागमन करते हैं।

वहीं गोरा लोकनाथपुर के बाबू राम कश्यप का कहना है कि रोजाना इस पुल से चार से पांच हजार की तादाद में लोग गुजरते हैं। वही प्रमोद कुमार शर्मा का ग्रामीणों के हौसले को सलाम करते हुए कहते हैं कि ग्रामीणों की इस पहल को देखकर शासन को भी अब इस पुल की याद आ गई है। यही वजह है कि अब इसके निर्माण कार्य में अब तेजी आई है।

खुद बना ली कच्ची सड़क दिखाया आइना :  बरेली के सुरेश शर्मा नगर के लोगों ने उन लोगों के लिए नजीर पेश की है, जो खुद कुछ करने की बजाय हर बात के लिए प्रशासन का दरवाजा ही खटखटाते रहते हैं। यहां पर भैरव नगर कालोनी में बजरंग ढाबा के बराबर एक सड़क है। सालों से यह सड़क खराब है। हालत यह थी कि बरसात में यहां तालाब सा नजारा हो जाता था। बच्चे स्कूल नहीं जा पाते थे। नगर निगम से शिकायत हुई लेकिन लोगों की सुनवाई नहीं हुई तो लोगों ने खुद ही इसमें सुधार करने का बीड़ा उठाया।

लोगों ने मिलकर पैसे जुटाए और फिर मलबा और मिट्टी डालकर कच्ची सड़क बना ली। अब न सिर्फ लोग आ जा सकते है बल्कि स्कूली बच्चे भी आराम से स्कूल जा रहे हैं। यहां के पार्षद नरेश पटेल का कहना है कि लोगों ने सबके लिए उदाहरण पेश किया है। खास बात यह है कि यह सड़क भैरव नगर कालोनी और निर्माण नगर कालोनी दोनों को जोड़ती है। ऐसे में इसके न बनने से लोगों को बहुत परेशानी थी।  

Posted By: Abhishek Pandey

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