जेएनएन, बरेली : एक गांव में छत पर सुखाने के लिए कपड़े डालने गई युवती पर बंदरों ने हमला बोल दिया। बचने के लिए भागते समय छत से गिरकर युवती घायल हो गई। परिजनों ने गंभीर अवस्था में उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया जहां इलाज के दौरान उसकी सांस थम गईं। गांव में इस तरह की यह चौथी घटना है।

गांव रजऊ में बंदरों ने आतंक मचा रखा है।

छत पर मौजूद झुंड ने किया हमला : रविवार दोपहर लगभग एक बजे मिथिलेश (20) पुत्री शिवदयाल घर की छत पर कपड़े सुखाने गई थीं। छत पर बंदर पहले से बैठे थे। जब तक वह कुछ समझ पातीं, बंदरों का झुंड उनकी ओर झपट पड़ा। वह छत से गिर पड़ीं। चीख-पुकार सुन परिजनों ने बाहर निकल कर देखा तो मिथिलेश खड़ंजे पर पड़ी थीं। उनके सिर से खून बह रहा था। परिजन तुरंत मिथिलेश को जिला अस्पताल ले गए। जहां इलाज के दौरान दो घंटे बाद उनकी मौत हो गई। 

बंदरों के हमले से हुई चौथी मौत : रजऊ गांव में यह बंदरों के हमले से दो साल में चौथी मौत है, जबकि दो दर्जन से अधिक लोग घायल हो चुके हैं। 2018 में बंदर एक घर से चादर उठा ले गए थे। बिटोली देवी ने बंदरों से चादर छीनने की कोशिश की। इस पर बंदरों ने हमला कर उन्हें छत से गिरा दिया, जिससे उनकी मौत हो गई थी।कुंवरसेन यादव और एक बुजर्ग महिला की बंदरों के हमले में मौत हुई। बंदर आए दिन लोगों पर हमला कर उन्हें घायल कर देते हैं। डर के चलते लोग छत पर जाने से कतराते हैं।

पत्र खूब चले, कार्रवाई नहीं हो सकी: बंदरों के हमलों से होने वाली मौतों को देखते हुए केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार नगर निगम और जिला अस्पताल के सीएमएस भी नगर आयुक्त को पत्र लिख चुके है। सीआरपीएफ कैंप भिटोरा में भी बंदरों ने आतंक मचा रखा है। मामले में कार्रवाई वन विभाग की अनुमति पर जाकर अटक जाती है। इसके लिए शासन तक पत्राचार हुआ, लेकिन लंबे समय से बंदरों के पकड़ने को अभियान शुरू नहीं हो सका है।

 

Posted By: Abhishek Pandey

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