बरेली, जेएनएन। Neta Ji Subhash Chand Bose Jyanti News : जनवरी 1941...यानी ठीक 80 साल पहले देश का वीर सपूत यानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने बरेली के डीएवी कॉलेज मैदान पर पहली और आखिरी जनसभा की थी। कांग्रेस स्टूडेंट फेडरेशन ने उन्हें आमंत्रित किया था। फेडरेशन के सचिव थे शहर के डीडीपुरम निवासी अमरनाथ अग्रवाल। समाजसेवी अमरनाथ अग्रवाल का दिसंबर 2016 में देहावसान हो गया। हालांकि उनके बेटे हर्ष अग्रवाल ने उस ऐतिहासिक जनसभा से जुड़े किस्से पिता से खूब सुने थे, जो आज भी उनके जेहन में जीवंत हैैं। हर्ष अग्रवाल ने ये किस्से दैनिक जागरण से साझा किए। एक रिपोर्ट ...

पिता से सुनीं बातों को ताजा करते हुए हर्ष अग्रवाल बताते हैंं कि आज की तरह ही सर्दी का मौसम होने के बावजूद डीएवी कॉलेज के मैदान पर विशाल जनसमूह पसीने से तर-ब-तर था। वजह, देश के सच्चे महानायकों में शुमार नेताजी सुभाष चंद्र बोस जो मैदान पर आने वाले थे। आम लोगों की भीड़ के बीच से ही वह मंच पर पहुंचे, लेकिन इससे पहले किसी को इस बात का अंदाजा न हो सका।

यही नेताजी की खासियत थी। कि वो हर रूप में ढल जाते थे। सफेद ऊनी शाल पहनकर वो मंच पर पहुंचे और जनसमूह ने नेताजी के नारे लगाने शुरू कर दिए। नेताजी के चेहरे का तेज किसी सूर्य सा चमक रहा था। पिता बताते थे कि नेताजी ने माइक संभाला और बोले- 'नौजवान तूफान की तरह होता है, जो अपने पर आ जाए तो बड़े से बड़े दरख्त तिनके की तरह उड़ा ले जाता है।

इसलिए नौजवानों, तुम भी देश को आजाद कराने के लिए उठ खड़े हो और अंग्रेजी हुकूमत की गुलामी की बेडिय़ां तोड़ दों और अपनी भारत माता को आजाद कराओ। शहरवासियों को संबोधित करते समय उनकी बुलंद आवाज मैदान में जुटे विशाल जनसमूह के दिल में उतर रही थी। 

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