जागरण संवाददाता, बरेली : पिछले पांच साल से स्वास्थ्य महकमा जिले में प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम के मरीजों को नकारता रहा जबकि 35 साल पहले बड़ी संख्या में खतरनाक मलेरिया फैला था। जिला मलेरिया विभाग के रिकार्ड ने हकीकत सामने लाकर रख दी है। वर्ष 1980 के बाद लगातार कई साल तक मलेरिया का रिकार्ड रखा गया। हर बार खतरनाक मलेरिया के मरीज भी मिलते रहे।

जिला मलेरिया विभाग ने बीते दिनों शासन को पिछले पांच साल की रिपोर्ट भेजी थी, जिसमें पूर्व के पांच वर्षो में मलेरिया का खतरनाक प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम पैरासाइट का एक भी मरीज नहीं होना बताया गया था। पांच साल बाद अचानक सात हजार से अधिक फाल्सीपेरम के मरीज निकलने से स्वास्थ्य विभाग में खलबली मची हुई है। इसी बीच जिला मलेरिया विभाग का एक और रिकार्ड सामने आया है। इसमें विभाग ने वर्ष 1980 से 1998 तक मलेरिया के मरीजों का आंकड़ा दर्ज किया है। रिकार्ड के अनुसार वर्ष 1983 में जिले में 1406, वर्ष 1984 में 1814 और वर्ष 1985 में 556 फाल्सीपेरम के मरीज निकले थे। उस वक्त प्लाज्मोडियम वाईवेक्स के साथ फाल्सीपेरम भी खूब मिला था। फिर धीरे-धीरे यह आंकड़ा कम होता चला गया।

यह रहा आंकड़ा

वर्ष - मरीज जांचें - वाईवेक्स - फाल्सीपेरम

1983 - 173231 - 5583 - 1406

1984 - 198934 - 10778 - 1814

1985 - 144832 - 4881 - 556

1986 - 128012 - 1949 - 159

1987 - 137521 - 1000 - 140

वर्जन

जिले में करीब 35 साल पहले भी फाल्सीपेरम के मामले पाए गए थे। उस वक्त लगातार तीन साल खतरनाक मलेरिया के मरीज मिले। बाद में धीरे-धीरे मरीजों की संख्या में कमी आ गई।

डॉ. रंजन गौतम, जिला संक्रामक अधिकारी

Posted By: Jagran

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