जेएनएन, बरेली :पहले घातक फाल्सीपेरम को नजर अंदाज किया और अब मलेरिया के उसी बुखार की तपिश के बीच जानलेवा डेंगू भी डराने आ धमका है। वो डेंगू, जो दर्जनों जानें हर साल निगल जाता है। ज्यादा तो नहीं लेकिन, निजी मेडिकल कॉलेज की रिपोर्ट के मुताबिक, 14 मरीजों में डेंगू के लक्षण सामने आ चुके हैं। डॉक्टरों की मानें तो डेंगू के मच्छरों के पनपने का मौसम चल रहा है। अक्टूबर भर खतरा और बना रहेगा। इसलिए भी क्योंकि पूरा अमला अभी फाल्सीफेरम से निपटने में डटा है और दबे पांव डेंगू का मच्छर घरों में कहर बरपा रहा है। लिहाजा, दोहरी मार से बचना है तो खुद सतर्क हो जाएं। बेपरवाह बना स्वास्थ्य विभाग

डेंगू की आमद के साथ ही स्वास्थ्य विभाग फिर कठघरे में है। इसलिए क्योंकि डेंगू पर निगाह रखने के दावे तमाम थे, मगर उसे रोका नहीं जा सका है। अभी तक स्वास्थ्य विभाग के साथ नगर निगम की टीम फील्ड में निकल घर-घर जाकर डेंगू के लार्वा की पड़ताल नहीं कर रही है। एंटी लार्वा के जिले भर में छिड़काव कराने के दावों की पोल खुल रही है। अगर, समय रहते इस दिशा में भी कदम उठ जाते तो डेंगू को पैदा ही नहीं होने दिया जाता। निजी मेडिकल कॉलेज ने चेताया

एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज में भर्ती 14 मरीजों में डेंगू के लक्षण मिल चुके हैं। सभी मरीजों को अलग वार्ड में रखा गया है। इसकी रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग को भेज दी है लेकिन, वह नए सिरे से जांच की बात कर रहा है। यानी जिस तरह मलेरिया को नजरअंदाज किया, वही रवैया डेंगू को लेकर भी अपनाया जा रहा है। डेंगू मिटाने वाली दो हजार गम्बूसिया मछलियां लापता

डेंगू के लार्वा को पनपने से पहले ही नष्ट करने के लिए मलेरिया विभाग की ओर से मंगवाई गई दो हजार गम्बूसिया मछलियों लापता हो गई हैं। इन्हें पिछले वर्ष शहर के अक्षर विहार और संजय कम्युनिटी हाल के तालाब में डलवाने का दावा था। अब इनका कोई रिकार्ड मलेरिया विभाग के पास नहीं है। अधिकारियों को इस बात की भी खबर नहीं है कि मछलिया जिंदा हैं या मर गई। इन मछलियों को जिले के विभिन्न तालाबों में छोड़ा जाना था। बावजूद सिर्फ दो तालाबों में डलवाकर विभाग ने खानापूर्ति कर ली। नोटिस जारी करके भूला निगम और मलेरिया विभाग

घरों और सरकारी कार्यालयों में लगे एसी, कूलर या किसी स्थान पर भरे पानी में डेंगू पनपने की जांच के लिए सरकारी टीमें अभी नहीं निकली हैं। मलेरिया विभाग से लेकर नगर निगम तक के अधिकारी सिर्फ नोटिस तक ही सीमित हैं। 2017 में जिन घरों या कार्यालयों में डेंगू के लार्वा मिले, वहां फालोअप तक करना मुनासिब नहीं समझा। वार्ड बनाकर झाड़ा पल्ला

जिले में डेंगू के मरीज मिलने के बाद हरकत में आए स्वास्थ्य विभाग ने जिला चिकित्सालय में 10 बेडों का डेंगू वार्ड बनाकर पल्ला झाड़ लिया है। कहते हैं, मच्छरदानी की भी व्यवस्था कर दी है। दवाएं भी रखवा दी गई हैं। हर साल जातीं जानें

फाल्सीपेरम मलेरिया ने अचानक रौद्र रूप धारण किया है। स्वास्थ्य विभाग तैयारी न होने का तर्क इसीलिए दे रहा है लेकिन, डेंगू पर जवाब क्या होगा? यह बुखार तो हर साल आता है। कभी कम, कभी सैकड़ों की तादात में जानें निगलकर चला जाता है। बावजूद उससे निपटने की मुकम्मल तैयारी नहीं हो पाई। वर्जन -

एसआरएमएस की ओर से 14 डेंगू के मरीजों की सूची भेजी गई है। इनकी पुष्टि विभाग की ओर से कराई जाएगी। वहीं, जिला चिकित्सालय में मरीजों के लिए अलग से डेंगू वार्ड बनाया गया है।

-वीके शुक्ला, सीएमओ तीन तरह का होता है डेंगू

डेंगू तीन तरह का होता है। पहला क्लासिकल (साधारण) डेंगू बुखार, दूसरा डेंगू हैमरेजिक बुखार। तीसरा डेंगू शॉक सिंड्रोम। तीनों डेंगू में से दूसरा और तीसरा डेंगू ज्यादा खतरनाक होता है। जबकि साधारण डेंगू बुखार खुद ठीक हो जाता है। बरसात के बाद पसारता पांव

बरसात के बाद डेंगू सबसे ज्यादा फैलता है। इसी मौसम में सबसे ज्यादा मच्छर पनपते हैं। हालांकि, जैसे-जैसे तापमान 30 डिग्री के नीचे पहुंचता है, डेंगू अपने आप खत्म हो जाता है। खुद बचना सीखें डेंगू से

-घर या ऑफिस के आसपास पानी जमा न होने दें, जमा पानी में पेट्रोल या केरोसिन डाल दें।

-कूलर, फूलदान, गमलों, पक्षियों को रखा जाने वाला पानी हप्ते में एक बार जरूर बदलें।

-खिड़कियों और दरवाजों को अधिक से अधिक बंद रखें।

-घर के भीतर हफ्ते में एक बार मच्छरनाशक दवा का छिड़काव जरूर करें।

-शरीर को अधिक से अधिक ढकने वाले कपड़े पहने।

-रात को सोते समय मच्छरदानी लगाएं। इन नुस्खों से पास नहीं आएगा डेंगू

-कमरे में कपूर जला दें और 10 मिनट के लिए खिड़की और दरवाजों को बंद कर दें।

-नीम के तेल को हाथ-पैरों में लगाएं। नारियल के तेल में नीम का तेल मिलाकर दीया जलाना भी कारगर।

-शरीर पर तुलसी के पत्तों का रस लगाएं। तुलसी का पौधा भी घरों से मच्छर दूर भगाता है।

-रिफिल में लिक्विड खत्म होने पर उसमें नींबू का रस और नीलगिरी का तेल भरकर लगा दें।

-कमरे में तेजपत्ता जलाने से आने वाली खुशबू भी बेहद कारगर। बच्चों में खतरा ज्यादा

बच्चों का इम्युन सिस्टम ज्यादा कमजोर होता है। वे खुले में ज्यादा रहते हैं, इसलिए उनके प्रति सचेत होने की जरूरत है।

-अभिभावक बच्चों को घर से बाहर भेजते समय पूरे कपड़े पहनाकर भेजें। खेलने वाली जगह पानी न भरा हो।

-स्कूल प्रशासन इस बात का ध्यान रखे कि कैंपस में मच्छर न पनप पाएं। बहुत छोटे बच्चे को शरीर पर रैशेज, उलटी होने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।

Posted By: Jagran

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