यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 23, 2015 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
मोबाइल टॉवर से गर्भ को मिल रहे खतरे के सिग्नल
सुशील कुमार, बरेली : मोबाइल टावर के रेडिएशन का हमला अब गर्भवती महिलाओं के गर्भ पर है। इसके कारण महिल

सुशील कुमार, बरेली : मोबाइल टावर के रेडिएशन का हमला अब गर्भवती महिलाओं के गर्भ पर है। इसके कारण महिलाओं में गर्भपात के केस बढ़ रहे हैं। पिछले तीन सालों में दस फीसद मिस कैरेज केसों की संख्या में वृद्धि हुई है। इसका कारण चिकित्सक रेडिएशन को मान रहे हैं। गर्भवती महिलाओं को मोबाइल आदि का प्रयोग डिलीवरी के बाद ही करने का सुझाव दिया जा रहा है।
ऐसे करता है रेडिएशन वार
मोबाइल टावर का रेडिएशन 60 डिग्री कोण से नीचे बहता है। जहां आबादी अधिक होगी वहां सिग्नल वाले एंटीना को 110 डिग्री कोण फिट किया जाता है ताकि आबादी में सिग्नल पहुंच सकें। यदि आबादी दूर होती है तो एंटीना खड़ा लगाया जाता है जिसे 90 डिग्री कोण कहते हैं। मोबाइल टावर का रेडिएशन यानी विकिरण का असर गर्भ में होता है सबसे पहले ब्लड स्पॉट आता है और जांच में बच्चा खराब मिलता है। चिकित्सकों के मुताबिक विकिरण गर्भ को अधिक ऊष्मा देता है।
साल में सवा लाख बच्चे
आंकड़ों पर गौर करें तो साल में लगभग दो लाख महिलाएं गर्भवती होती हैं, लेकिन सवा लाख बच्चे ही पैदा होते हैं। इसमें लगभग 200 बच्चे पैदा होते ही दम तोड़ देते हैं। दस फीसद बच्चे यानी 20 हजार केस गर्भपात से जुड़े होते हैं। चिकित्सकों के मुताबिक मिस कैरेज का एक बड़ा कारण मोबाइल टावर रेडिएशन, एक्स रे विकिरण आदि हैं। इसमें मोबाइल टावर रेडिएशन से मिस कैरेज होने वाले बच्चों की संख्या साल में 700 तक पहुंच रही है।
क्या कहती हैं चिकित्सक
रेडिएशन के अधिक प्रभाव से बच्चे मिस कैरेज होते हैं। इसका आंकड़ा बढ़ रहा है इसलिए गर्भवती महिलाएं मोबाइल आदि का प्रयोग डिलीवरी के बाद करें।
--भारती सरन, वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ
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ये बात सही है कि रेडिएशन का असर गर्भ पर हो रहा है। इसके कारण महिलाओं को कई बार गर्भपात भी कराना पड़ता है। जरूरी यह है कि गर्भ के दौरान मोबाइल आदि का अधिक प्रयोग न करें।
--अलका अग्रवाल, वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ
