जागरण संवाददाता, बरेली : बाल सुरक्षा और मानव तस्करी के अभियान में अक्सर बच्चों और महिलाओं की जान पर बन आती है। इस दौरान कुछ सावधानियां और सुरक्षात्मक रवैया अपनाया जाए तो कई मासूमों की जिंदगियां बचाई जा सकती है। शुक्रवार को पुलिस लाइन में बरेली पुलिस और दिल्ली की शक्ति वाहिनी संस्था के संयुक्त तत्वावधान में चाइल्ड प्रोटेक्शन और ह्यूमन ट्रैफिकिंग पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। आईजी विजय सिंह मीना, डीआईजी आरकेएस राठौर, एसएसपी धर्मवीर यादव सहित सभी आला अधिकारी मौजूद थे।

जुलाई बच्चों की सुरक्षा को समर्पित

आईजी ने कहा कि जुलाई का महीना बच्चों की सुरक्षा और मानव तस्करी रोकने के प्रति समर्पित किया गया है। प्रदेश में 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है। ऑपरेशन मुस्कान की शुरुआत बहुत अच्छी हुई थी। डीआईजी ने उत्साह बढ़ाते हुए प्रयास को सराहा। उन्होंने पुलिस के मानव तस्करी रोकने के लिए रणनीति के तहत चले अभियान का जिक्र करते हुए ऑपरेशन मुस्कान की प्रशंसा की।

अनदेखा करना भी अपराध

शक्ति वाहिनी संस्था के रवि कांत ने बताया कि अगर बाल यौन शोषण की घटना लोग देखते हैं तो उनका दायित्व है कि वे स्थानीय पुलिस को सूचना दें। यौन शोषण होता देखकर भी सूचना नहीं दी जाती है तो यह बाल यौन शोषण अधिनियम 2012 की धारा 21 के तहत दंडनीय अपराध है, जिसमें छह महीने तक की सजा और जुर्माना लगाया जा सकता है।

कराई जाए काउंसलिंग

उन्होंने बताया कि कई बार वेश्यावृत्ति से छुड़ाई गई लड़कियां स्वीकार नहीं करती कि उनसे वेश्यावृत्ति करवाई जाती है। ऐसे मामलों में सीडब्ल्यूसी में पेश कर काउंसिलिंग कराई जानी चाहिए।

शॉर्ट फिल्मों में दिखाई दिक्कतें

कार्यशाला में बताया गया कि वर्ष 2011 से 2014 के बीच लगभग 3 लाख 27 हजार 694 बच्चे गुम हुए हैं। इसमें से अधिकतर आज तक नहीं मिल सके। रेसक्यू ऑपरेशन की शॉर्ट फिल्म में दिखाया गया कि कैसे दिल्ली के एक मंदिर के पीछे की दीवार में गड्ढे बनाकर चोर रास्तों से लड़कियों को छिपाया जाता था।

चाइल्ड लेबर एक्ट की जगह 370 ज्यादा प्रभावी

रविकांत ने कहा कि चाइल्ड लेबर एक्ट एक कमजोर सा कानून है। बंधुआ मजदूरी के मामलों में आईपीसी की धारा 370 का उपयोग प्रभावी हो सकता है। गाजियाबाद की एक घटना का जिक्र करते हुए बताया कि एक बड़े बिल्डर के घर में 14 साल की झारखंड से आई लड़की रात बारह बजे छत से गिरकर मर जाती है। पुलिस बिल्डर के बयान के आधार पर उसे दुर्घटना मान लेती है।

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