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बाराबंकी में बढ़ा वायरल संक्रमण, जिला अस्पताल में इलाज कराने रोज पहुंच रहे हैं डेढ़ हजार लोग

By Prahlad Tiwari Edited By: Dharmendra Pandey
Published: Fri, 24 Jul 2026 06:34 PM (IST)

Barabanki News: बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ने के साथ दवा की खपत में इजाफा हुआ है। बीते तीन माह ...और पढ़ें

जिला अस्पताल बाराबंकी

जिला अस्पताल बाराबंकी

HighLights

  1. जिला अस्पताल में 5000 पैरासिटामोल टैबलेट और 700 बोतल ग्लूकोज रोज की खपत

  2. वायरल बुखार के साथ संक्रामक रोगों पर पैरासिटामोल से वार

संवाद सूत्र, बाराबंकी। बारिश यानी मानसून सीजन में प्रतिदिन मौसम का मिजाज बदल रहा है। इसके उतार चढ़ाव का असर सेहत पर पड़ रहा है।

बाराबंकी में वायरल बुखार के मरीजों की संख्या में इजाफा होने से जिला अस्पताल में नित्य पांच हजार पैरासिटामोल टैबलेट की खपत हो रही है। इसके साथ ही प्रतिदिन 700 बोतल ग्लूकोज मरीजों को चढ़ाया जा रहा है। संक्रामक रोगों ने पांव पसारने शुरू कर दिए हैं। यहां की ओपीडी में औसतन नित्य डेढ़ हजार मरीज पहुंचते हैं।

बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ने के साथ दवा की खपत में इजाफा हुआ है। बीते तीन माह में मरीजों को तीन लाख 87 हजार 900 पैरासिटामोल की गोलियां खिलाई गईं। अभी स्टाक में करीब दो लाख टैबलेट बचे हैं।

इधर एक पखवारे से डेढ़ हजार से अधिक मरीज ओपीडी में आ रहे हैं। अप्रैल, मई व जून में 20 हजार 925 बोतल मरीजों को चढ़ाई गई। इसमें सर्वाधिक खपत एनएस ग्लूकोज 8350 बोतल की हुई है।

तीन माह में पैरासिटामोल की खपत

अप्रैल -  एक लाख 78 हजार टैबलेट
मई -   96 हजार 900 टैबलेट
जून -   एक लाख 13 हजार टैबलेट
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तीन माह में ग्लूकोज की खपत
                जून    मई - अप्रैल
डीएनएस - 3175- 2325- 1725
आरएल - 1975 - 1825 - 1550
एनएस -  2650 - 3300 -2400

मरीजों का समुचित उपचार

मुख्य चिकित्साधीक्षक, डॉ. जेपी मौर्य ने बताया कि पैरासिटामोल टैबलेट व ग्लूकोज की सर्वाधिक खपत होती है। मानसून के साथ ही वायरल बुखार व संक्रामक रोगियों की संख्या बढ़ जाती हैं। इसी कारण बुखार, खांसी जुकाम, डायरिया, पेट दर्द व अन्य बीमारियों की दवाएं पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। मरीजों का समुचित उपचार किया जा रहा है।

एक माह से बंद अल्ट्रासाउंड जांच

जिला अस्पताल में एक माह बाद भी अल्ट्रासाउंड जांच सेवा शुरू नहीं हो सकी। रेडियोलाजिस्ट चिकित्सक की तैनाती न होने से मरीजों को निजी केंद्रों पर जांच के लिए भेजा जा रहा है। अल्ट्रासाउंड के मेडिकोलीगल के लिए भी पीड़ितों को राजधानी की दौड़ लगानी पड़ती है।