डिजिटल करेंसी से मिलेगा गरीबों को राशन? यूपी में नई योजना शुरू करने का काम शुरू
उत्तर प्रदेश में गरीबों को डिजिटल करेंसी (ई-रुपी) के माध्यम से राशन वितरण की तैयारी चल रही है। गुजरात की ...और पढ़ें

HighLights
डिजिटल करेंसी से राशन वितरण की तैयारी उत्तर प्रदेश में।
बाराबंकी को पायलट प्रोजेक्ट के लिए चुना जा सकता है।
घटतौली रुकेगी, पारदर्शिता और सुविधा बढ़ेगी लाभार्थियों को।
जागरण संवाददाता, बाराबंकी। गुजरात में डिजिटल करेंसी से गरीबों के राशन वितरण प्रणाली का शुभारंभ होने के बाद अब यूपी में योजना शुरू करने पर काम शुरू कर दिया गया है। केंद्रीय खाद्य रसद मंत्रालय की टीम ने बाराबंकी में प्राथमिक सर्वेक्षण के बाद मोबाइल डेटा कलेक्शन करवा लिया है माना जा रहा है कि प्रदेश में यह प्रणाली लागू करने के लिए माडल जिला के तौर पर घोषित किया जा सकता है।
गरीबों के राशन वितरण में पारदर्शिता लाने और आमजन की सुविधा के लिए डिजिटल करेंसी प्रणाली एटीएम की तर्ज पर काम करेगी। कार्डधारक अपने राशन को निर्धारित तिथि में कहीं से भी प्राप्त कर सकेंगे।
गुजरात के गांधीनगर में 15 फरवरी को गृह मंत्री अमित शाह ने डिजिटल करेंसी प्रणाली वितरण व्यवस्था का शुभारंभ किया था। अब उत्तर प्रदेश सरकार को यह व्यवस्था लागू करनी है। यूपी के खाद्य रसद राज्यमंत्री सतीश शर्मा का गृह जनपद बाराबंकी होने के कारण यहां पायलट प्रोजेक्ट पर काम शुरू करवाए जाने की बात कही जा रही है।
डिजिटल करेंसी (ई-रुपी) के माध्यम से गरीबों को राशन उपलब्ध कराने की योजना पर मंथन चल रहा है। पात्र लाभार्थी ई-रुपी के जरिए सीधे मशीन से अपना राशन प्राप्त कर सकेंगे। इससे घटतौली और अनियमितताओं की समस्या खत्म होने की उम्मीद है। इस हाईटेक की दिशा में खाद्य रसद मंत्री का जिले होने से जनपद महत्वपूर्ण है। यह व्यवस्था पायलट प्रोजेक्ट के रूप में गुजरात में शुरू हो गई है।
बाराबंकी में 1380 कोटेदार हैं, जिनके माध्यम से लगभग 6.42 लाख लाभार्थियों को राशन वितरित किया जाता है। पायलट प्रोजेक्ट से पहले खाद्य एवं रसद मंत्रालय की ओर से चार टीमें यूपी के सिर्फ बाराबंकी भेजी गई थीं। इन टीमों ने करीब 15 दिनों तक गोपनीय तरीके से विभिन्न व्यवस्थाओं का अध्ययन कर इनपुट एकत्र किए और अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंप दी है। टीमों ने कोटेदार, लाभार्थियों से बात की, स्मार्ट फोन ओर कीपैड मोबाइल के प्रयोग का औसत लिया गया है।
पायलट प्रोजेक्ट में फिर शामिल हो सकता है बाराबंकी
बाराबंकी एक बार फिर सार्वजनिक वितरण प्रणाली में बड़े बदलाव का केंद्र बन सकता है। डिजिटल करेंसी के माध्यम से गरीबों को राशन उपलब्ध कराने की दिशा में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शामिल किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
वर्ष 2012 में कंप्यूटरीकृत डिजिटल प्रणाली लागू करने के लिए बाराबंकी को पायलट प्रोजेक्ट में रखा गया था। इसके बाद ही राष्ट्रीय स्तर पर नई व्यवस्थाओं की शुरुआत हुई। वर्ष 2021 में डोर-स्टेप डिलीवरी योजना के तहत भी बाराबंकी के मसौली ब्लाक में पायलट प्रोजेक्ट चलाया गया था, जो सफल रहा। इसके बाद में इसे प्रदेश व देश के अन्य हिस्सों में लागू किया गया था। अब डिजिटल करेंसी ‘ई-रुपी’ के माध्यम से राशन वितरण की योजना पर मंथन चल रहा है।
ऐसे मिलेगा राशन
निदेशालय स्तर केंद्रीय संयुक्त सचिव की बैठक हो चुकी है। नई व्यवस्था के अनुसार सभी राशन कार्ड धारकों के मोबाइल में ई-रुपी एप इंस्टाल होगा, जिसमें केंद्र सरकार प्रति महीने मोबाइल के एप पर मुफ्त ई-रुपी भेजेगा। यह डिजिटल करेंसी सिर्फ राशन खरीदने के लिए इस्तेमाल किया जा सकेगा।
स्मार्टफोन में एप और कीपैड मोबाइल में ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) के जरिए ई-रुपी का प्रयोग होगा। कार्डधारक कहीं से भी राशन ले पाएंगे, इसके लिए जगह-जगह अन्नपूर्णा पूर्ति मशीन लगेगी, दुकानों पर भी व्यवस्था की जाएगी।
अभी कोई आधिकारिक आदेश नहीं आया है, लेकिन खाद्य रसद मंत्री का जिला होने की वजह से यह जनपद महत्वपूर्ण है। पूर्व में इस जिले में विभिन्न पायलट प्रोजेक्ट से सफलता मिली, जो प्रदेश में लागू हुए हैं। -डा. राकेश तिवारी, जिला पूर्ति अधिकारी, बाराबंकी।
