बाराबंकी : नदियों को प्रदूषण से मुक्त कराने के लिए दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन गड्ढा खोदकर किए जाने के अदालती आदेश के बावजूद आस्था आड़े आती रही है। लेकिन, इस बार श्रीगणेश प्रतिमा विसर्जन के दौरान जिले में पांच लोगों के डूबने की घटना के बाद प्रशासन नदी के किनारे गड्ढा खोदकर प्रतिमा विसर्जन पर बल दे रहा है। गुरुवार को नवमी के दिन ही गोमती नदी के तीर गांव स्थित घाट के किनारे गड्ढा खोदकर प्रतिमाओं का विसर्जन शुरू कराया गया।

हैदरगढ़ तहसील मुख्यालय सहित आसपास के गांवों की प्रतिमाओं का विसर्जन गोमती के औसानेश्वर, बाबा टीकाराम, नैपुरा व राजघाट सुबेहा में होता आ रहा है। वर्ष 2017 में नदियों में प्रदूषण का मुद्दा उठा तो सबसे पहले औसानेश्वर घाट के किनारे जेसीबी से गड्ढा खोदकर उसमें पानी भरवाकर प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया। अन्य स्थानों पर आस्था में डूबे लोगों ने नदियों में भी विसर्जन जारी रखा। इस बार हैदरगढ़ के इलाके की नजीर बनाकर गोमती के साथ ही कल्याणी नदी व सरयू नदी के तटों पर भी प्रतिमा विसर्जन के लिए गड्ढे खोदवाए जा रहे हैं।

औसानेश्वर घाट पर गुरुवार को गड्ढ़ा खोदकर तैयार कर दिया गया। एसडीएम हैदरगढ़ शालिनी प्रभाकर व सीओ नवीन कुमार ने भी मौका मुआयना किया। संबंधित को सहयोग के लिए सराहा। गोमती नदी के विभिन्न घाटों पर जिले के अलावा रायबरेली, सुलतानपुर व अमेठी जिले की प्रतिमाओं का भी विसर्जन होता है।

कल्याणी नदी के तट पर रासमनेहीघाट के तासीपुर में भी एसडीएम विजय द्विवेदी ने गड्ढा खोदवाया। सरयू नदी के तट पर संजय सेतु के निकट नदी के किनारे बैरीकेडिग कराई गई है।

एसडीएम सदर सुमित यादव ने कल्याणी नदी के सफदरगंज घाट, टीकापुर घाट, देवा इलाके माती स्थित सरैया घाट व रेठ नदी के चिनहटा घाट का निरीक्षण कर दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन की तैयारियों का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि नदियों के किनारे गड्ढे खोदकर विसर्जन में लोग सहयोग कर रहे हैं।

Edited By: Jagran