बाराबंकी : घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है फिर छात्रवृत्ति के भरोसे पर जिन छात्र-छात्राओं ने उच्च शिक्षा के लिए दाखिला कॉलेजों में ले लिया वह अब परेशान हैं। अधिकांश विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति नहीं आई है। समाज कल्याण विभाग के चक्कर लगाने के साथ ही मुख्यमंत्री तक शिकायत कर चुके हैं फिर भी नतीजा सिफर है। अधिकारी व पटल प्रभारी बजट न होने की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ रहे हैं, जबकि कॉलेजों की ओर से फीस जमा करने का इतना अधिक दबाव बनाया जा रहा है। इससे विद्यार्थी कॉलेज ही नहीं जा रहे हैं।

सिद्धौर ब्लॉक क्षेत्र के ग्राम थरि मजरे ख्वाजा नगर निवासी अमित कुमार व आलोक कुमार अनुसूचित जाति के पात्र गृहस्थी वाले परिवार से हैं। यह दोनों जिला मुख्यालय पर रसौली के निकट एक कॉलेज में बी. फार्मा की पढ़ाई कर रहे हैं। अमित के पिता राम कुमार रावत व आलोक के पिता रामबख्श का कहना है कि वह सीमांत किसान एवं मजदूर हैं। इतनी जमीन भी नहीं है कि बेचकर फीस जमा की जा सके। कॉलेज में ताने दिए जाते हैं इसलिए बच्चे कॉलेज जाने से कतराते हैं।

समाज कल्याण अधिकारी एसपी सिंह ने बताया कि यह एक-दो छात्रों की नहीं ज्यादातर छात्रों की है। 35 फीसद एससी विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति बजट के अभाव में नहीं आई है।

इनसेट-

छात्रवृत्ति में देरी का यह है कारण : समाज कल्याण अधिकारी के अनुसार लोकसभा चुनाव अधिसूचना 10 मार्च को लागू होने के बाद चुनाव आयोग ने छात्रवृत्ति की धनराशि जारी किए जाने पर भी रोक लगा दी। समीक्षा के बाद चार अप्रैल को अनुमति दी तब तक वित्तीय वर्ष की अंतिम तिथि 31 मार्च बीत जाने के कारण धनराशि सरेंडर हो गई। दोबारा डिमांड भेजी गई है।

Posted By: Jagran

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