बाराबंकी: सरकार भले ही गर्भवती महिलाओं के सर्वांगीण विकास के लिए आर्थिक सहायता देती हो लेकिन उस मदद का लाभ सीएचसी पर अल्ट्रासाउंड सुविधा उपलब्ध नहीं मिल पा रही है।

सरकार गर्भवती महिलाओं को कमजोरी से बचाकर जच्चा-बच्चा को स्वस्थ रखने के उद्देश्य से जननी सुरक्षा योजना के तहत पहले 1400 रुपये देती थी लेकिन पांच हजार रुपये दिये जाते हैं। यह पूरी की पूरी सहायता गर्भवती की अल्ट्रासाउंड जांच कराने एवं दौड़ धूप में खर्च हो जाती है। गर्भवती महिला को पेट में पल रहे गर्भ की स्थिति की जांच कम से कम चार-पांच बार करानी पड़ती है। सीएचसी पर अल्ट्रासाउंड की सुविधा न होने के कारण महिलाओं को मजबूरी में इधर-उधर भटकना पड़ता है। अब तक निजी अस्पतालों में अल्ट्रासाउंड जांच करने के लिये 300 से 400 रुपये लिये जाते थे, लेकिन अब उसे बढ़ाकर 500 रुपये खर्च हो जाते हैं।

इस संबंध में सीएचसी अधीक्षक डॉ. संदीप तिवारी कहते हैं कि यह सही है कि गर्भवती महिलाओं के लिए अल्ट्रासाउंड जांच जरूरी होती है लेकिन यह सुविधा सीएचसी पर न होने के कारण बाहर जाना पड़ता है।

Posted By: Jagran