बाराबंकी: विकास खंड बंकी अंतर्गत ग्राम बड़ेल में गैर तरही नशिस्त मुशायरा का आयोजन किया गया। अध्यक्षता डॉ. रेहान अलवी व संचालन शाद बड़ेलवी ने किया। मुशायरे में हास्य कवि अमरजीत यादव व आरिफ भनौलवी भी शामिल हुए।

मुशायरे में डॉ. रेहान अल्वी ने सुनाया-'उजाले सुबह के खैरात में नहीं मिलते, सियाह रात से होकर गुजरना पड़ता है।' नफीस बाराबंकवी ने कहा-'मुझको जैसे भी चाहो उबालो पियो, हम सियासी मरज की दवा बन गए।' जाहिद बाराबंकवी ने कहा-'सर की दस्तार बचे चाह नहीं है सर की, जो बड़ी चीज है वह बड़ी रहती है।' मुख्तार बाराबंकवी ने सुनाया-'मेरे वतन को जाने नजर किसकी लग गई, हर सिम्त हो रहे हैं फसादात इन दिनों।' आरिफ भनौलवी ने कहा-'अब जमीनों का सफर और नहीं हो सकता, मेरी फिक्रों को खलाओ का सफर करना है।' शाद बड़ेलवी ने सुनाया-सितमगर बाज आजा बेबसों पर जुल्म ढाने से, कयामत रूनुमा हो सकती है इनको सताने से। अमरजीत यादव ने कहा-'चलो आज दिल का यूं सौदा करें हम, मुनाफा तुम्हारा खसारा हमारा।' मुशायरे का आगाज हाफिज मोहम्मद तुफैल ने नाते पाक से किया। हाजी मो. शफीक, ओपी आनंद, मो. जीशान, मजहर अली, डॉ. जाहिद अली, अख्तर अली, अब्दुर्रहमान आदि मौजूद रहे।

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