संवादसूत्र, अलियाबाद (बाराबंकी) : अपने आराध्य भगवान श्रीराम की कथा का श्रवण करने एक बार भगवान शिव अपनी अर्धांगिनी सती को लेकर दक्षिण भारत गए। जहां बैठकर उन्होंने श्रीराम कथा को पूरे मनोयोग से सुना। श्रीराम भगवान हैं, वह इस पर विश्वास नहीं कर पा रही थीं। उनकी यह मनोदशा देखकर शिव ने सती को राम की परीक्षा लेने की बात कही।

रामलीला मैदान में श्रीराम कथा के पहले दिन कथा में अंबरीष चैतन्य महराज ने कहा कि परीक्षा लेने के संदर्भ में श्रीरामचरितमानस में गोस्वामी तुलसीदास ने लिखा है कि यदि तुम्हारे मन में श्रीराम को भगवान होने में जरा भी शक है, तो उनकी तुम परीक्षा ले सकती हो। वेश बदलकर सती परीक्षा लेने के लिए राम के पास पहुंचीं, उन्हें देखते ही भगवान श्रीराम ने माता का संबोधन कहकर प्रणाम किया। जबकि सती ने सीता का रूप धारण किया था। इस दृश्य को देख रहे भगवान शिव ने मन ही मन श्रीराम को प्रणाम किया तथा सती द्वारा सीता का वेश धारण करने के कारण उन्हें त्यागने का निर्णय लिया। कथा कहते हुए श्रोताओं से कहा कि नैतिकता और आत्म निर्णय अपने हाथ में होती है। इसका अनुकरण भगवान शिव के संकल्प से किया जा सकता है। इस मौके पर जगदीश प्रसाद गुप्ता, यजमान सुरेश चंद्र गुप्ता, महेश गुप्ता, श्याम चौरसिया, हेमंत शुक्ला, रवि यादव, समेत सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।

Posted By: Jagran

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