बाराबंकी : दरियाबाद रेलवे स्टेशन 21वीं सदी में भी आधुनिकता की चकाचौंध से कोसों दूर है। यहा पर आधा सैकड़ा से ज्यादा ट्रेनों का ठहराव है, लेकिन सुविधाएं बद से बदतर हैं। दोनों प्लेटफार्मो पर प्रकाश की व्यवस्था नहीं रहती। जिससे शाम होते ही स्टेशन अंधेरे में गुम हो जाता है।

अंधेरे की आड़ लेकर अराजकतत्व छोटी-बड़ी घटनाओं को आए दिन अंजाम देते रहते हैं। सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं है। यहा पर जनरेटर की व्यवस्था है, परंतु उसका प्रयोग प्रकाश के लिए नहीं होता है। कर्मचारियों के कक्षों तक ही प्रकाश व्यवस्था रहती है। दैनिक यात्री धनंजय कुमार बताते हैं कि कभी भी स्टेशन पर उजाला नहीं रहता है। एक दो बार शिकायत पर जनरेटर चलाया गया। दीपक सोनी बताते हैं कि आए दिन अंधेरा रहता है। अंधेरे में महिला यात्री असुरक्षित महसूस करती हैं। मोबाइल की लाइट जलाकर ट्रेन का इंतजार करने को विवश होते हैं। यही नहीं, प्लेटफार्म को पार करने समेत तमाम दुश्वारिया झेलनी पड़ती है।

शौचालय हैं बदहाल : रेलवे स्टेशन दरियाबाद पर शौचालयों की स्थिति काफी बदहाल है। यहा पर शौचालयों में झाड़ झखाड़ उगी है। यात्रियों को खुले में शौंच जाना पड़ता है, लेकिन किसी ने इसकी सुध नहीं ली है। छिनैती की वारदातों पर एक नजर : अंधेरे का फायदा उठाकर यहा आए दिन लुटेरे छिनैती की घटनाओं को अंजाम दिया करते हैं। हाल ही में 31 अगस्त को वाराणसी की महिला शबनम से चेन स्नेचिंग की वारदात हुई। वहीं 20 अप्रैल-2017 को करीब भोर 4 बजे नेपाल निवासी मुस्कान पुत्री हिमलाल से जनता एक्सप्रेस में छिनैती। वाराणसी से लखनऊ जा रही थी युवती। बैग में रखा पाच हजार की नगदी, मोबाइल व एटीएम लेकर लुटेरे फरार। 22 नवंबर 2016 को दिल्ली- अयोध्या एक्सप्रेस में रात नौ बजे रामसनेहीघाट की एक महिला यात्री से छिनैती हुई।

लेटफार्म दो पर जनरेटर की व्यवस्था नहीं है। प्लेटफार्म एक पर जनरेटर से प्रकाश की व्यवस्था की जाती है। कभी कभी व्यस्तता के कारण जनरेटर चलाने में देरी हो जाती है।

भरत भूषण , अधीक्षक, रेलवे स्टेशन दरियाबाद।

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