2027 की जनगणना से बदलेगा बाराबंकी का विकास ढांचा, 40 लाख के करीब पहुंची अनुमानित आबादी
बाराबंकी की आबादी 2011 के 32.60 लाख से बढ़कर अनुमानित 40 लाख होने से जिले की विकास योजनाएं और प्राथमिकताएं बदलेंगी।

ये तस्वीर एआई द्वारा जनरेट की गई है।
HighLights
बाराबंकी की आबादी 40 लाख तक पहुंचने का अनुमान।
कृषि, बुनकर उद्योग में नए सिरे से विकास की योजना।
शहरी नियोजन, पर्यटन, उद्योग में बड़े बदलाव अपेक्षित।
प्रेम अवस्थी, बाराबंकी। वर्ष 2011 की जनगणना के 32.60 लाख आबादी के आंकड़े पर अब तक चल रही योजनाओं का दायरा बदलने वाला है। 2027 में होने वाली जनगणना के प्रथम चरण में जून में आए अनुमानित आंकड़े के अनुसार जिले की आबादी 40 लाख के करीब पहुंच गई है।
करीब 22 प्रतिशत की वृद्धि के साथ जातीय आंकड़ा भी पहली बार सामने आएगा, जिससे सरकार के कल्याणकारी सरोकार और विकास की प्राथमिकताएं नए सिरे से तय होंगी।
जिले का सबसे बड़ा सरोकार कृषि ही रहेगा, पर उसका स्वरूप बदलेगा। धान-गेहूं के साथ केला, टमाटर, आलू, गन्ना, तरबूज-खरबूज और मेंथा जैसी नकदी फसलों पर आठ लाख से अधिक किसान निर्भर हैं।
आबादी बढ़ने से जोत घटेगी, ऐसे में सरकार का फोकस छोटे किसानों के लिए क्लस्टर आधारित खेती, फूड प्रोसेसिंग और कोल्ड चेन पर होगा।
दूसरा बड़ा बदलाव बुनकर और खाद्य उद्योग को लेकर होगा। एक जिला एक उत्पाद में चयनित हथकरघा और वैश्विक मिठाई के रूप में चयनित चंद्रकला के लिए जातीय आंकड़ा अहम होगा। बुनकर बाहुल्य मसौली, देवा और नगरीय क्षेत्रों में पिछड़ी जातियों की वास्तविक संख्या सामने आने पर हथकरघा क्लस्टर, मुद्रा योजना और ओडीओपी के बजट में बढ़ोतरी तय मानी जा रही है।
तीसरा सरोकार नगरीय नियोजन का है। पूरा जिला पहले ही स्टेट कैपिटल रीजन का हिस्सा है और शहर मुख्यालय को लेकर बाराबंकी विकास प्राधिकरण का प्रस्ताव तीसरी बार शासन को भेजा गया है। 40 लाख आबादी के दबाव में मास्टर प्लान, रिंग रोड और पेयजल-सीवरेज योजनाओं को नए मानक पर बनाना होगा।
धार्मिक पर्यटन और औद्योगिक विकास चौथा बड़ा सरोकार बनेंगे।
देवा में सूफी संत हाजी वारिस अली की मजार पर लाखों जायरीन, श्रीलोधेश्वर महादेवा में काशी विश्वनाथ की तर्ज पर बन रहा कारिडोर और सतरिख में प्रस्तावित श्रीराम गुरुकुल कारिडोर को देखते हुए पर्यटन अवसंरचना पर जोर बढ़ेगा।
वहीं हैदरगढ़ में पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे और रामसनेहीघाट में लखनऊ-अयोध्या हाईवे किनारे बन रहे औद्योगिक कारिडोर के लिए नई जनगणना में श्रम शक्ति और जातिगत कौशल का डेटा उद्योगों को आकर्षित करने में निर्णायक होगा।
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