पति की मौत के बाद अंग दान कर बचाईं तीन जिंदगियां, बाराबंकी की अर्चना ने पेश की मानवता की मिसाल
बाराबंकी की अर्चना मिश्रा ने पति मनोज मिश्रा के निधन के बाद उनके अंगदान कर मानवता की मिसाल पेश की। ...और पढ़ें

डॉ. राम मनोहर लोहिया संस्थान में मनोज मिश्रा के निधन व अंगदान के बाद नमन करते चिकित्सक
HighLights
अर्चना मिश्रा ने पति के अंगदान का निर्णय लिया।
ब्रेन हेमरेज के बाद मनोज मिश्रा ब्रेन डेड घोषित।
अंगदान से तीन जरूरतमंद लोगों को नया जीवन मिलेगा।
संवाद सूत्र, बाराबंकी। मिश्री पुरवा की अर्चना मिश्रा ने अपने पति मनोज मिश्रा के निधन के बाद अंगदान कर मानवता की मिसाल पेश की। ब्रेन हेमरेज के बाद चिकित्सकों ने ब्रेन डेड घोषित किए जाने पर स्वजन ने उनकी किडनी और लीवर दान करने की सहमति दी। अंगदान से तीन जरूरतमंद लोगों को जीवन मिलने की उम्मीद है।
मनोज मिश्रा को 25 अगस्त को घर में स्नान करते समय ब्रेन हेमरेज हो गया था। स्वजन उन्हें उपचार के लिए लोकबंधु अस्पताल ले गए। वहां से चिकित्सकों ने उन्हें राम मनोहर लोहिया संस्थान रेफर कर दिया।
संस्थान में उनका उपचार चल रहा था। 29 अगस्त को चिकित्सकों ने परिवारजन को बताया कि मनोज का मस्तिष्क काम करना बंद कर चुका है और उनके बचने की संभावना नहीं है। चिकित्सकों ने स्वजन को अंगदान की जानकारी दी।
स्वास्थ्यकर्मियों ने दी भावभीनी अंतिम विदाई
परिवार के सभी सदस्यों ने सर्वसम्मति से अंगदान का निर्णय लिया। इसके बाद चिकित्सकों ने मनोज की किडनी और लीवर दान के लिए सुरक्षित किए। पत्नी अर्चना मिश्रा ने बताया कि चिकित्सक ने परिवार को समझाया कि अंगदान से किसी दूसरे व्यक्ति की जिंदगी बचाई जा सकती है। इसी भावना से परिवार ने अंगदान की सहमति दी।
मनोज अपने पीछे पत्नी अर्चना मिश्रा, 11 वर्षीय बेटी और तीन वर्षीय पुत्र को छोड़ गए हैं। राम मनोहर लोहिया संस्थान में चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों ने मनोज को नमन करते हुए पुष्प अर्पित किए और भावभीनी अंतिम विदाई दी।
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