बाराबंकी, जागरण संवाददाता। वर्षों से हो रही नगर की रामलीला व दशहरा मेला में हर साल बजट बढ़ रहा है, लेकिन आयोजकों के साथ ही दर्शकों का आकर्षण भी कम नहीं है। लोग इसमें तन, मन व धन से सहयोग करते हैं। खर्च बढ़ जाने पर उसे वहन करने के लिए भी कुछ लोग हैं, जो बिना कुछ कहे आगे बढ़कर सहयोग करते हैं, पर श्रेय लेने में विश्वास नहीं रखते। 

श्रीराम लीला सेवा समिति के प्रबंधक राम लखन श्रीवास्तव का कहना है कि पिछले वर्ष 14 लाख रुपये का खर्च आया था। इस बार रायबरेली से अत्याधुनिक दो रथ मंगवाए गए हैं, जिन पर एक लाख दो हजार रुपये खर्च बढ़ गया है। इसी तरह अन्य कई खर्चे हैं। इसलिए इस बार 15 से 16 लाख रुपये तक का खर्च आएगा। 

जन सहयोग से होती है धन की व्यवस्था

प्रबंधक ने बताया कि रामलीला व दशहरा के लिए पूरे शहर में चंदा मांगा जाता है। लोग दिल खोलकर चंदा देते हैं। दशहरा मेला परिसर के किराए से भी कुछ धनराशि की व्यवस्था हो जाती है। कुछ लोग ऐसे भी हैं जो धनराशि की कमी होने पर उसकी भरपाई करते हैं। सरदार गुनवंत सिंह शानदार आतिशबाजी कराते थे। गुनवंत सिंह के निधन के बाद उनके पुत्र सरदार भूपेंद्र सिंह आतिशबाजी कराते हैं। 

एनओसी में आ रही परेशानी

श्रीराम लीला सेवा समिति के अध्यक्ष अनिल कुमार अग्रवाल का कहना है कि दशहरा मेला आयोजन में दिक्कत आ रही है। हर चीज के लिए इस बार अनापत्ति प्रमाण पत्र मांगा जा रहा है। हम लोग प्रशासनिक शर्तों को पूरा करने का प्रयास कर रहे हैं। 

अध्यक्ष अनिल कुमार अग्रवाल का कहना है कि दशहरा मेला का उद्घाटन जिलाधिकारी के हाथों कराए जाने की परंपरा है। इस बार भी कमेटी ने नवागत जिलाधिकारी अविनाश कुमार को आमंत्रित किया है।

दशहरे मेले में सभी करते हैं आर्थिक सहयोग

कमेटी के उपाध्यक्ष भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष संतोष सिंह का कहना है कि नगर के छोटे दुकानदार से लेकर बड़े उद्योगपति तक सभी दशहरा मेले में आर्थिक सहयोग करते हैं। प्रशासनिक सहयोग भी मिलता रहा है। इस बार भी जिलाधिकारी ने मेला व्यवस्था में सहयोग का आश्वासन दिया है।

प्रशासन का पूरा सहयोग

जिलाधिकारी अविनाश कुमार ने बताया कि मेला कमेटी के लोग मिले थे। मेले की परंपरा का निर्वहन किया जाएगा। सफाई, बिजली और पानी जैसी व्यवस्थाओं के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देशित कर दिया गया है।

रूप सज्जा करने वालों में उत्साह

रामलीला में पात्रों की रूप सज्जा करने वालों में भी मेला के प्रति उत्साह है। रूप सज्जा करने वाले विनय सिंह, नितेश मिश्र, अंकित वर्मा, रमेश निगम, सुख नंदन, केशरी नंदन, गणेश पेंटर व गिरजा शंकर पेंटर ने कहा कि वह लोग हर साल रूप सज्जा सहयोग के रूप में करते हैं।

बोले दर्शक

दशहरा मेला मैदान में शूर्पणखा के नाक-कान भंजन की लीला देखने बच्चे के साथ आए विजय नगर के अरुण कुमार मिश्र ने बताया कि रामचरित मानस के दोहे पर आधारित रामलीला होती है। इसलिए ज्यादा आकर्षण रहता है। बच्चों को भी सीखने का मौका मिलता है।

महुआरी पुरवा के अमित गुप्ता ने बताया कि वह भी अपने पिता के साथ आते थे अब अपने पुत्र को लेकर आए हैं। हर साल रामलीला के प्रति आकर्षण बढ़ रहा है।

Edited By: Prem Shankar

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