बाराबंकी में पुनर्जीवित होगी बाणहन्या नदी, लोधेश्वर श्रद्धालुओं को लाभ; प्रदेश की पहली नदी का चयन
बाराबंकी में लोधेश्वर महादेव के पास विलुप्त बाणहन्या नदी को 'विकसित भारत-जी राम जी' कार्यक्रम के तहत पुनर्जीवित किया जाएगा।

HighLights
विलुप्त बाणहन्या नदी का पुनरुद्धार 'जी राम जी' कार्यक्रम से।
महाभारत काल से जुड़ी यह नदी 11 किलोमीटर लंबी है।
लोधेश्वर महादेव श्रद्धालुओं को प्राचीन नदी के सुंदर दर्शन होंगे।
दीपक मिश्रा, बाराबंकी। लोधेश्वर महादेव के श्रद्धालुओं को जल्द ही एक भूली-बिसरी नदी के भी दर्शन हो सकेंगे। महादेवा में बाणहन्या नदी, जिसे बोहनिया नदी भी कहा जाता है, अब पुराने स्वरूप में लौटने की तैयारी में है। करीब 11 किलोमीटर लंबी इस विलुप्त नदी को विकसित भारत-जी राम जी से पुनर्जीवित किया जाएगा।
मान्यता है कि महाभारत काल में अर्जुन ने लोधेश्वर महादेव के जलाभिषेक के लिए अपने बाण से इस नदी को प्रकट किया था। यह नदी भगहर झील से निकलकर सरयू में समाहित होती थी। समय के साथ इसका प्रवाह खत्म हो गया और नदी केवल इतिहास व लोकमान्यता में रह गई। अब जीपीएस से पुराने प्रवाह क्षेत्र की तलाश की गई है।
डिप्टी कमिश्नर ने प्रवाह क्षेत्र का निरीक्षण कर नदी को पुनर्जीवित करने की कार्ययोजना की प्रक्रिया शुरू करा दी है। नदी की खोदाई के साथ प्राकृतिक जलधारा को फिर से आकार मिलेगा। इससे श्रमिकों को रोजगार व वर्षा जल संरक्षण की उम्मीद जगी है।
आस्था की यात्रा में नदी
महादेवा में गंगा दशहरा, सावन, कजली तीज, अगहन और फाल्गुन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु कांवड़ लेकर जलाभिषेक को आते हैं। नदी के पुनर्जीवन से महादेव से पहले नदी के सुंदर दर्शन होंगे।
संवर रहा महादेवा
लोधेश्वर कारिडोर का निर्माण करीब 175 करोड़ रुपये से हो रहा है। डिजाइन काशी विश्वनाथ की तर्ज पर प्रवेश द्वार, बाउंड्रीवाल और परिक्रमा पथ समेत विभिन्न निर्माण कराए जा रहे हैं।
प्रदेश में बाणहन्या नदी का चयन ‘जी राम जी’ में पहली नदी के रूप में किया गया है। कार्ययोजना तैयार कर आगे की प्रक्रिया शुरू होगी। सब कुछ योजना के मुताबिक रहा तो अगले वर्ष 2027 मई में नदी की खोदाई का शुभारंभ किया जा सकता है।
-विकास मिश्रा, डिप्टी कमिश्नर
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