जागरण कार्यालय, बाराबंकी : प्रदेश के कृषि मंत्री आनंद सिंह ने कहा कि सरकार हाइब्रिड धान की नई प्रजाति के लिए केंद्र सरकार व विशेषज्ञों से संपर्क साध रही है। उम्मीद है कि प्रदेश के किसानों को जल्द उन्नत धान की प्रजाति मिल सकेगी। प्रजाति के चयन में यह ध्यान दिया जा रहा कि उसमें ब्रोकेन कम हो।

कृषि मंत्री शुक्रवार को ग्राम दौलतपुर स्थित प्रगतिशील किसान रामसरन वर्मा के हाईटेक फार्म हाउस के भ्रमण पर आए। उन्होंने कहा कि सरकार धान की उपज को बढ़ाने के लिए बीज का वितरण किसानों को कर रही है। तैयार उपज की मौजूदा प्रजाति में ब्रोकेन की अधिकता बताते हुए मिलर्स मौजूदा हाइब्रिड धान की प्रजाति को नकार रहे हैं। यह सही है कि सरकार हाईब्रिड धान की खरीद में व्यवस्था से जुड़े लोग किसानों के धान की खरीद में आनाकानी करते हैं। इससे किसान को खुलेबाजार में अपनी उपज की बिक्री औने-पौने दाम पर करनी पड़ती है।

कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार केंद्र सरकार व विशेषज्ञों से बातचीत कर इसका समाधान ढूंढ रही है कि हाइब्रिड की कोई ऐसी उन्नत प्रजाति विकसित हो जिससे निकलने वाले चावल की टूटन न हो। शतप्रतिशत चावल सुरक्षित निकल सके। इसके लिए बीज शोध एवं उत्पादन करने वाले विशेषज्ञों से संपर्क साधा गया है। धान विशेषज्ञों के प्रस्ताव भी मांगे गए हैं। जिसके परीक्षण के बाद चयन किया जाना है। उम्मीद है कि जल्द ही प्रदेश के धान उत्पादक किसानों को एक उन्नत धान बीज की प्रजाति मिल सके।

देखी आधुनिक खेती : कृषि मंत्री ने हाइटेक फार्म हाउस में आधुनिक पद्धति तैयार उन्नत खेती देख हतप्रभ हो गए। उन्होंने केला, टमाटर व अन्य फसलों की उपज देख खुशी जतायी। यहां उपयोग में लाए जा रहे कृषि उपकरण की भी गहन जानकारी ली। उन्होंने कहा कि निश्चित रूप से यह फार्म हाउस और रामसरन वर्मा के फसल चक्र व सहफसली खेती की विधा से अन्य किसानों को जोड़ने की जरूरत है। उन्होंने रामसरन वर्मा को गोंडा जिले में आकर किसानों को फसल चक्र व सहफसली खेती की विधा बताने की अपील की।

पशुपालन और खेती : कृषि मंत्री ने कहा कि जिस प्रकार से बैलों का वध किया जा रहा है। उसे रोकने के लिए जरूरी है कि इसे लाभप्रद बनाया जाए। गोवंशीय पशुओं के गोबर व मूत्र से खाद तैयार करने की वैज्ञानिकों ने विधा तैयार की है। एक बैल के गोबर व मूत्र से एक माह में एक हेक्टेअर क्षेत्रफल के खेत के लिए खाद तैयार की जा सकती है। उन्होंने कहा कि कृषि विभाग इस विधा का उपयोग करने के लिए गांवों में किसानों को प्रेरित करे। गाय व बैल को उपयोगी बनाकर ही उनका वध रोका जा सकता है। कृषि निदेशक देवमित्र सिंह, संयुक्त कृषि निदेशक फैजाबाद मंडल ओपी सिंह, सहारनपुर मंडल के संयुक्त कृषि निदेशक डॉ. आनंद त्रिपाठी, फैजाबाद मंडल के डॉ.आरएस वर्मा, उपकृषि निदेशक डॉ. आर के सिंह, जिला कृषि रक्षा अधिकारी डॉ. एल एस यादव, जिला कृषि अधिकारी आर के यादव, भूमि संरक्षण अधिकारी गोमती अनिल कुमार यादव तथा प्रगतिशील किसान दरियाबाद संजय बली मौजूद रहे।

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