जागरण संवाददाता, बांदा :

माध्यमिक शिक्षा विभाग द्वारा संचालित जिले के 28 राजकीय हाईस्कूल शासन की मंशा को मुंह चिढ़ा रहे हैं। इन विद्यालयों में शिक्षकों की कमी के चलते हालत कुछ ऐसे हैं कि ज्यादातर स्कूलों में प्रधानाचार्य को ही चपरासी से लेकर शिक्षक तक का कार्य करना पड़ता है। मानक की बात करें तो 28 विद्यालयों में 192 सहायक अध्यापकों की नियुक्ति होनी चाहिए। लेकिन 13 विद्यालय एक शिक्षक के सहारे ही संचालित हो रहे हैं। वहीं 7 विद्यालयों को केवल प्रधानाचार्य चला रहे हैं। विद्यालयों को खुले सात साल पूरे हो गए पर विभाग इन विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता लाने में नाकाम ही साबित हो रहा है। विद्यालयों में गुरूजी की खाली पड़ी कुर्सियों का आलम यह है कि छात्र-छात्राओं को गणित, विज्ञान, अंग्रेजी सहित संस्कृत जैसे महत्वपूर्ण विषयों तैयारी करना दिन में तारे देखने जैसा है। जिले के राजकीय विद्यालयों में कक्षा 9 में जहां 1460 तो दसवी में 1499 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। इन विद्यालयों की शिक्षा की गुणवत्ता की परख इसी बात से की जा सकती है कि बीते सात सालों में यहां विद्यार्थी मेधावियों की दौड़ में टिक नहीं पा रहे हैं। नरैनी क्षेत्र के राजकीय हाईस्कूल महुई के प्रधानाचार्य शिवकुमार मिश्रा बताते हैं जब से विद्यालय संचालित हुआ तब से वह अकेले ही स्कूल चला रहे हैं। बबेरू के समगरा गांव में संचालित राजकीय हाईस्कूल के प्रधानाचार्य अवधेश कुमार गुप्ता ने बताया कि शिक्षक न होने की स्थिति में अकेले ही विद्यालय से लेकर विभाग का काम देखना पड़ता है। छात्र बोले :

5-6 महीने बाद बोर्ड परीक्षा है। ऐसे में विषयों की तैयारी कैसे करें, ताकि अच्छे नंबर मिल जाएं।-अवधेश इस साल आयोजित होने वाली बोर्ड परीक्षा की तैयारी को लेकर काफी तनाव बना हुआ है।-वंदना विद्यालय में गणित, विज्ञान, अंग्रेजी जैसे विषयों की तैयारी नहीं हो पाती है।-अजय। शिक्षक न होने की स्थित के चलते विद्यालय में किसी भी बच्चे की तैयारी नहीं हो पाती है।-गुड़िया साहब बोले :

आयोग से जो शिक्षक आ रहे हैं उन्हें राजकीय हाईस्कूलों में नियुक्त किया जा रहा है। कई विद्यालयों हैं जहां तीन-चार शिक्षक तैनात किए गए हैं। हिफजुर्रहमान, जिला विद्यालय निरीक्षक , बांदा।

इनसेट

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विद्यालय की संख्या 28

शिक्षक 47

रिक्त पद 145

Posted By: Jagran