संवाद सहयोगी, नरैनी : जलसंरक्षण के लिए नए तालाबों को खोदवाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया। कुछ जगहों पर काम भी शुरू हो गया। बारिश के पहले एक-एक बूंद सहजने को जागरूक किया जा रहा है। लेकिन इसके उलट पहले से बने तालाब उपेक्षा का शिकार हो रहे हैं। इसी में शामिल है नरैनी का बंबा तालाब। पिछले दिनों तालाब के सुंदरीकरण पर एक करोड़ से ज्यादा का धन खर्च किया गया। लेकिन अनदेखी चलते अब तालाब सूखने की कगार पर है।

कस्बा का बंबा तालाब स्थानीय प्रशासन की उपेक्षा का शिकार है। इस तालाब को सन 2013-14 में तत्कालीन उप जिलाधिकारी सीबी सिंह के कार्यकाल में जीर्णाेद्धार किया गया। तालाब के भीटे से अतिक्रमण व कब्जे हटवाकर पौधरोपण कराया गया। तालाब की खोदाई करवाकर राज्य वित्त योजना से करीब एक करोड़ 15 लाख की लागत से इसका सुंदरीकरण भी करवा दिया गया। तालाब की सीढि़यां, तालाब के किनारे सीसी मार्ग, शौचालय का निर्माण, सौर ऊर्जा की स्ट्रीट लाइट आदि कार्य कराए गए। तालाब को नहर से भरवाया गया। जिससे पानी का लेबल हमेशा बना रहे। इसके लिए दो रिग बोर भी कराए गए थे। जिसमें एक बंद है। आरोप है कि तालाब के भीटा में लगवाई गई सौर ऊर्जा की स्ट्रीट लाइट की बैट्री नगर पंचायत के कर्मचारियों द्वारा निकाल ली गई। अब शाम ढलते ही यहां अंधेरा रहता है। नगर पंचायत की अनदेखी के चलते यह तालाब सूखने की कगार पर पहुंच गया है। तालाब में चारों ओर गंदगी फैली है। शौचालयों की नियमित सफाई भी नहीं होती है।

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तालाब की सुंदरता को अराजकतत्वों की लगी नजर, हुआ बेजार

नरैनी : स्थानीय लोग बताते हैं कि सुंदरीकरण के बाद यहां पर सुबह-शाम लोग टहलने आने लगे थे। समय के साथ अधिकारियों ने मुंह फेर लिया। धीरे-धीरे पांच सौ मीटर दूर शराब ठेके से मदिरा खरीदकर आने वाले जमघट लगाने लगे। दीवार फांद अंदर घुसने वाले शराबियों का यह ठौर बन गया। कई विवाद भी हुए और लोगों ने मुंह मोड़ लिया। कुर्सियां व बेरीकेडिग तोड़ तार हो गए चोरी

तालाब परिसर में लोगों के बैठने के लिए सीमेंट की लाल कुर्सियां डलवाई गई थीं। अराजकतत्वों ने गेट तोड़ दिया। कुर्सियां गायब कर दी गईं। जालियां और बेरीकेडिग तोड़कर तार पार कर दिए गए। हालत यह है कि प्यास बुझाने के लिए लगाए गए नलों की टोटियां तक गायब हो गई हैं। कस्बे के मोहम्मद अजीम, वसीक, रिकू दिवाकर, रवींद्र कुमार, जीतू लखेरा आदि लोगों ने तालाब की व्यवस्था दुरुस्त कराकर अराजक तत्वों पर अंकुश लगाए जाने की मांग जिला प्रशासन से की है।

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