जागरण संवाददाता, बांदा : शुगर के मरीज की ऑक्सीजन लेवल कम होने से अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई। जिसको लेकर तीमारदारों का गुस्सा भड़क उठा। लापरवाही के चलते उपचार सही न मिलने से तीन घंटे तक मरीज के तड़प-तड़प कर दम तोड़ने का आरोप लगाया। आक्रोशित तीमारदारों के हंगामा करने से कर्मचारी कक्ष में ताला लगाकर भाग गए। पुलिस ने समझाकर किसी तरह मामला शांत कराया है।

रविवार रात जिला अस्पताल एक बार फिर सुर्खियों में रहा। वहां 50 वर्षीय मरीज ओमप्रकाश निवासी शहर के मोहल्ला तिदवारी रोड को तीमारदारों ने जिला अस्पताल में भर्ती कराया था। मरीज का शुगर व ब्लड प्रेशर बढ़ा था। इसके अलावा ऑक्सीजन लेवल भी घट रहा था। इससे उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। मृतक की बेटी व अन्य स्वजन ने बताया कि एक दिन पहले उन्होंने शहर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया था। जहां चिकित्सक ने ऑक्सीजन लेवल घटना की बात कहकर जिला अस्पताल ले जाने की सलाह दी थी। आरोप लगाया कि जिला अस्पताल में एक बोतल लगाने के बाद चिकित्सक व स्टाफ मरीज की बिगड़ती हालत देखने नहीं आ रहे थे। कई बार कहने के बाद भी कोई नहीं सुन रहा था। कर्मचारी सो रहे थे। चिकित्सकों व कर्मचारियों को कई बार बुलाया। लेकिन मरीज तड़पता रहा। कोई भी उन्हें देखने नहीं आया। सिलिडर में ऑक्सीजन खत्म होने के बाद भी उसे बदला नहीं गया। मरीजों के उपचार में घोर लापरवाही बरती जा रही है। जिससे मरीजों की मौत हो रही है। तीमारदारों के आक्रोशित होने व आरोप लगाने से काफी देर तक हंगामा चलता रहा। तीमारदार शव घर ले जाने को तैयार नहीं थे। अस्पताल कर्मियों ने मामले की सूचना कोतवाली में दी। इससे कोतवाली व चौकी की पुलिस मौके पर पहुंच गई। पुलिस के काफी समझाने पर स्वजन शव घर ले जाने को तैयार हुए हैं।

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- चिकित्सकों व स्टाफ ने उपचार में कोई लापरवाही नहीं की है। मरीज की हालत नाजुक होने से तीमारदारों को मेडिकल कॉलेज ले जाने की सलाह दी गई थी। इसके बाद भी वह मरीज को मेडिकल कॉलेज नहीं ले गए हैं। हार्ट अटैक होने से मौत होना लग रही है।

- डॉ. उदयभान सिंह सीएमएस जिला अस्पताल

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कोरोना की जांच रिपोर्ट आई थी निगेटिव

- अस्पताल में जिस मरीज की मौत के बाद स्वजन आरोप लगा रहे थे। चिकित्सक की सलाह से मरीज की कोरोना जांच कराई गई थी। लेकिन जांच में मरीज की रिपोर्ट निगेटिव आई थी।