दिव्यांगजनों के हुनर को मिलेगी नई पहचान, OSOP योजना से रेलवे स्टेशनों पर शुरू कर सकेंगे खुद का बिजनेस
बुंदेलखंड के दिव्यांगजनों को अब रेलवे स्टेशनों पर 'एक स्टेशन एक उत्पाद' (ओएसओपी) योजना के तहत अपने स्थानीय उत्पादों को बेचने का अवसर मिलेगा।

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HighLights
दिव्यांगजनों को रेलवे स्टेशनों पर मिलेगा स्थानीय उत्पादों का बाजार।
'एक स्टेशन एक उत्पाद' योजना से स्वरोजगार को बढ़ावा मिलेगा।
बुंदेलखंड के कई स्टेशनों पर उपलब्ध होंगे स्टॉल/ट्रॉली।
जागरण संवाददाता, बांदा। बुंदेलखंड के दिव्यांगजनों के हुनर को अब रेलवे स्टेशन पर बाजार मिलेगा। घर या गांव में तैयार किए जाने वाले स्थानीय उत्पादों की बिक्री के लिए उत्तर मध्य रेलवे के प्रयागराज और झांसी मंडल के विभिन्न स्टेशनों पर एक स्टेशन एक उत्पाद (ओएसओपी) योजना के तहत स्टाल और ट्रॉली उपलब्ध कराई जा रही हैं।
इनमें स्थानीय हस्तशिल्प, खाद्य पदार्थ, कृषि उत्पाद, हथकरघा और क्षेत्र की पहचान वाले अन्य उत्पादों की बिक्री की जा सकेगी। इससे दिव्यांगजन अपने उत्पाद सीधे यात्रियों तक पहुंचाकर स्वरोजगार से जुड़ सकेंगे। बुंदेलखंड के मानिकपुर, चित्रकूट, अतर्रा, बांदा, भरुआ सुमेरपुर, महोबा जंक्शन, उरई और हरपालपुर रेलवे स्टेशनों पर अलग-अलग स्थानीय उत्पादों के लिए स्टाल या ट्राली निर्धारित की गई हैं। इससे स्थानीय कला, हस्तशिल्प और खाद्य उत्पादों को नया बाजार मिलेगा।
मानिकपुर में पेड़ा से पत्थर-लकड़ी के उत्पाद तक
चित्रकूट जिले के मानिकपुर जंक्शन पर पेड़ा, आंवला उत्पाद, पत्थर व लकड़ी के उत्पाद, हर्ब्स, स्थानीय फलों के अचार, रबड़ी और कुल्फी की बिक्री के लिए स्टाल उपलब्ध है। इसके लिए इच्छुक दिव्यांगजन 24 अगस्त 2026 तक आवेदन कर सकते हैं।
चित्रकूट में लकड़ी के खिलौनों की बिक्री
झांसी मंडल के चित्रकूट रेलवे स्टेशन पर लकड़ी के खिलौनों की बिक्री के लिए स्टाल उपलब्ध है। इससे स्थानीय स्तर पर तैयार पारंपरिक खिलौनों को यात्रियों तक पहुंचाने का अवसर मिलेगा।
अतर्रा और बांदा में स्थानीय उत्पादों को बाजार
बांदा जिले के अतर्रा स्टेशन पर बरी-पापड़, अचार-मुरब्बा, बेकरी और चावल से बने उत्पादों की बिक्री के लिए ट्रॉली उपलब्ध है। वहीं बांदा स्टेशन पर शजर पत्थर कला, अचार-पापड़ और दलिया उत्पाद बेचे जा सकते हैं।
सुमेरपुर से महोबा तक स्थानीय उत्पादों की बिक्री
हमीरपुर के भरुआ सुमेरपुर स्टेशन पर मक्का और चावल से बने उत्पादों के लिए ट्रॉली है। महोबा जंक्शन पर गौरा स्टोन, क्राफ्ट, नमकीन और मुरब्बा की बिक्री के लिए स्टाल उपलब्ध है। जालौन के उरई स्टेशन पर चितेरी कला की पेंटिंग, कपड़े के बैग और बरी-पापड़ बेचे जा सकते हैं। महोबा जिले के हरपालपुर स्टेशन पर हथकरघा, बेकरी, लड्डू, पापड़, अचार और मुरब्बा उत्पादों के लिए ट्राली है।
ऐसे ले सकते हैं जानकारी
ओएसओपी के तहत स्टॉल या ट्रॉली लेने के इच्छुक दिव्यांगजन संबंधित रेलवे स्टेशन पर स्टेशन प्रबंधक या खाद्य निरीक्षक के कक्ष में जाकर जानकारी ले सकते हैं। झांसी मंडल के स्टेशनों के लिए मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय, झांसी तथा मानिकपुर के लिए मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय, प्रयागराज के संबंधित विभाग से भी जानकारी ली जा सकती है।
आवेदन के साथ आधार कार्ड और दिव्यांगता प्रमाणपत्र की प्रति देनी होगी। स्टॉल या ट्रॉली का आवंटन अधिकतम तीन माह के लिए किया जाएगा। इसके बाद अगले तीन माह के लिए दूसरे पात्र दिव्यांगजन को अवसर दिया जा सकता है। इससे अधिक लोगों को अपने उत्पाद बेचने और स्वरोजगार से जुड़ने का मौका मिलेगा।
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स्टेशनवार प्रमुख उत्पाद
स्टेशन स्टॉल/ट्रॉली प्रमुख उत्पाद
- मानिकपुर जंक्शन स्टाल पेड़ा, आंवला, पत्थर-लकड़ी उत्पाद, हर्ब्स, अचार, रबड़ी, कुल्फी
- चित्रकूट स्टॉल लकड़ी के खिलौने
- अतर्रा ट्राली बरी-पापड़, अचार-मुरब्बा, बेकरी, चावल उत्पाद
- बांदा स्टाल शजर पत्थर कला, अचार-पापड़, दलिया
- भरुआ सुमेरपुर ट्राली मक्का और चावल उत्पाद
- महोबा जंक्शन स्टाल गौरा स्टोन, क्राफ्ट, नमकीन, मुरब्बा
- उरई स्टाल चितेरी कला, कपड़े के बैग, बरी-पापड़
- हरपालपुर ट्राली हथकरघा, बेकरी, लड्डू, पापड़, अचार, मुरब्बा
ओएसओपी से दिव्यांगजनों को अपने स्थानीय उत्पाद बेचने के लिए आसानी से बाजार मिलेगा। इससे उनके उत्पाद यात्रियों तक पहुंचेंगे और आमदनी बढ़ाकर उन्हें स्वरोजगार में मदद मिलेगी।
डॉ. शिवम शर्मा, मुख्य जनसंपर्क अधिकारी, प्रयागराज
