अब गांव-गांव लगेगी शिक्षा चौपाल, निपुण होंगे बुंदेलखंड के नौनिहाल
बुंदेलखंड में निपुण भारत मिशन को जन-आंदोलन बनाने के लिए गांव-गांव शिक्षा चौपाल का आयोजन किया जाएगा। इसका उद्देश्य अभिभावकों ...और पढ़ें

HighLights
निपुण भारत मिशन को जन-आंदोलन का रूप दिया जाएगा।
गांव-गांव शिक्षा चौपाल लगाकर अभिभावकों को जोड़ा जाएगा।
बुंदेलखंड के 5 लाख से अधिक छात्रों को निपुण बनाने का लक्ष्य।
जागरण संवाददाता, बांदा। परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता को और बेहतर बनाने के लिए अब निपुण भारत मिशन को जन-आंदोलन का रूप दिया जाएगा।
इसके लिए बुंदेलखंड में गांव-गांव शिक्षा चौपाल का आयोजन कर अभिभावकों को जोड़ा जाएगा, ताकि वे भी बच्चों की पढ़ाई में सक्रिय भूमिका निभा सकें। बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा संचालित निपुण भारत मिशन का मुख्य उद्देश्य कक्षा-एक से तीन तक के बच्चों को बुनियादी भाषा और गणित में दक्ष (निपुण) बनाना है। इस अभियान को सफल बनाने के लिए अब केवल शिक्षक ही नहीं, बल्कि पूरा गांव जुटेगा।
बुंदेलखंड के पांचों जिलों बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर, महोबा व जालौन के कुल 6,277 परिषदीय विद्यालय संचालित हैं, जिनमें 5,04,904 छात्र अध्ययनरत हैं। इन सभी बच्चों को निपुण बनाकर उनके विद्यालयों को निपुण विद्यालय घोषित किया जाना है।
कार्ययोजना के अनुसार, प्रत्येक ग्राम पंचायत में शिक्षा चौपाल लगाई जाएगी। चौपाल में बच्चों के माता-पिता के साथ-साथ ग्राम प्रधान, एसएमसी अध्यक्ष और जनप्रतिनिधियों को विशेष रूप से आमंत्रित किया जाएगा। शिक्षा चौपाल में अभिभावकों को बताया जाएगा कि निपुण भारत मिशन क्या है, बच्चों के सीखने का स्तर कैसे जांचा जाता है और घर पर अभिभावक कैसे बच्चों को पढ़ने में मदद कर सकते हैं।
साथ ही विद्यालयों में बच्चों की नियमित उपस्थिति और ठहराव पर भी जोर दिया जाएगा। कई बार बच्चे स्कूल तो आते हैं, लेकिन घर पर पढ़ाई का माहौल न मिलने से उनका सीखने का स्तर कमजोर रह जाता है। शिक्षा चौपाल के माध्यम से माता-पिता को सरल तरीकों से बच्चों को पढ़ाने के गुर सिखाए जाएंगे।
उन्हें बाल-गिनती, कहानी सुनाने और शब्द-पहचान जैसी गतिविधियों में शामिल किया जाएगा। इसको लेकर ग्रामवार रोस्टर तैयार करने व शिक्षा चौपालों के आयोजन को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
खेती-किसानी में उलझे अभिभावकों के लिए जरूरी है शिक्षा चौपाल
बुंदेलखंड के गांवों की हकीकत यह है कि यहां ज्यादातर बच्चों के माता-पिता खेती-किसानी और मजदूरी में दिनभर जुटे रहते हैं। सुबह होते ही खेतों की ओर निकल जाना और देर शाम तक काम में लगे रहना आम दिनचर्या है। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान देना उनके लिए मुश्किल हो जाता है।
कई अभिभावक खुद कम पढ़े-लिखे हैं, इसलिए वे यह समझ ही नहीं पाते कि बच्चा स्कूल में क्या सीख रहा है और घर पर उसे कैसे मदद की जरूरत है। परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों का कहना है कि बच्चे स्कूल में तो नियमित आते हैं, लेकिन घर पर दोहराव न होने से वे जल्दी भूल जाते हैं।
खासकर कक्षा एक से तीन तक के बच्चे जो बुनियादी भाषा और गणित सीख रहे हैं, उन्हें घर पर अभ्यास की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। इसी कमी को दूर करने के लिए शिक्षा चौपाल की पहल बेहद अहम मानी जा रही है।
गांवों में शिक्षा चौपाल का आयोजन कर अभिभावकों को जोड़ा जाएगा, ताकि वे भी बच्चों की पढ़ाई में सक्रिय भूमिका निभा सकें। बेसिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे जल्द ही ग्रामवार रोस्टर तैयार कर शिक्षा चौपालों का आयोजन सुनिश्चित करें। इस पहल से प्राथमिक शिक्षा को नई गति मिलने की उम्मीद है। संतोष कुमार पांडेय, सहायक निदेशक, बेसिक शिक्षा, चित्रकूट धाम मंडल, बांदा
स्थिति एक नजर में-
| जिला | परिषदीय विद्यालय | छात्रों की संख्या |
|---|---|---|
| बांदा | 1725 | 1,62,399 |
| चित्रकूट | 1256 | 1,04,705 |
| हमीरपुर | 967 | 75,389 |
| महोबा | 840 | 71,191 |
| जालौन | 1489 | 91,230 |
| कुल योग | 6277 | 5,04,914 |
