प्रदीप द्विवेदी, बांदा : रासायनिक खाद के उपयोग से खेत की मिट्टी में अम्ल की मात्रा बढ़ने के साथ जिंक और बोरान जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी होती जा रही है। इसका दुष्प्रभाव मिट्टी पर तो पड़ ही रहा है। मानव स्वास्थ्य भी प्रभावित हो रहा है। कृषि वैज्ञानिकों के इस तर्क के आधार पर बुंदेलखंड के किसानों ने अब जैविक खेती की ओर कदम बढ़ा दिए हैं। इससे उत्पादन में बढ़ोतरी हुई और लागत में भी कमी आई है।

मंडल में तकरीबन 51 हजार किसान रासायनिक खेती छोड़कर इस अभियान से जुड़ चुके हैं। ये किसान परंपरागत फार्मूले पर ही जैविक फार्म तैयार करते हैं। इससे उत्पादन में भी व्यापक बढ़ोतरी हुई है। पिछले साल दलहन और तिलहन का प्रति हेक्टेयर औसत उत्पादन 16.29 कुंतल रहा था, जो इस वर्ष बढ़कर 18.43 कुंतल हो गया है। बड़ोखर खुर्द के प्रगतिशील किसान प्रेम सिंह बताते हैं कि इससे फसलों की लागत में भी कमी आई है। रासायनिक खादों से प्रति हेक्टेयर फसल के लिए 12 हजार रुपये खर्च होते थे, जैविक खेती से यह खर्च घटकर सिर्फ दो हजार रुपये रह गया है। जैविक खेती से लाभ

- भूमि की उपजाऊ क्षमता में वृद्धि होती है, सिंचाई अंतराल भी बढ़ जाता है।

- रासायनिक खाद पर निर्भरता कम होने से लागत में कमी आती है।

- फसलों की उत्पादकता बढ़ती है। बाजार में जैविक उत्पादों की मांग बढ़ने से ज्यादा लाभ होता है।

- भूमि की गुणवत्ता में सुधार होता है, जल धारण की क्षमता बढ़ती है।

- मिट्टी, खाद्य पदार्थ और जमीन में पानी के माध्यम से होने वाले प्रदूषण में कमी आती है।

- कचरे का उपयोग, खाद बनाने में होने से बीमारियों का खतरा कम हो जाता है। तैयार हुए आउटलेट :

अतर्रा स्थित जैविक कृषक विज्ञान शुक्ला, बरई मानपुर के लाल खां, छनेहरा लालपुर के मोहम्मद असलम खां सहित करीब छह किसानों ने यहां आउटलेट शुरू कराए हैं। इनमें किसानों को जैविक खेती का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। साथ ही खाद, बीज उपलब्ध कराने में मदद भी की जाती है। मंडल में जैविक कृषकों की स्थिति

जनपद कृषक

बांदा : 13050

चित्रकूट : 9036

हमीरपुर : 15850

महोबा : 13070

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योग : 51006

----------------------- कृषि विश्वविद्यालय की ओर से गांवों में जैविक मॉडल तैयार कराए जा रहे हैं। किसानों को जैविक खाद एवं दवाएं तैयार करने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। अगले पांच साल में पूरे मंडल को जैविक करने का लक्ष्य है।

-डा.यूएस गौतम, कुलपति, कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, बांदा

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