बांदा, जागरण संवाददाता। पचोखर गांव के बच्चे की डिप्थीरिया से मौत के बाद भी स्वास्थ्य विभाग की टीम गहरी नींद सोई है। शुक्रवार को टीम गांव नहीं पहुंची। इसी तरह त्रिवेणी गांव में हुआ था। डिप्थीरिया (गलघोटू) के फैलाव में देर से विभागीय अधिकारी व कर्मचारी हरकत में आए थे। इससे चार बच्चों की जान से हाथ धोना पड़ा था। हालांकि सीएचसी अधीक्षक गांव में दो मरीज मिलने के बाद तीन बार गांव के स्कूलों में टीकाकरण कराने का दावा कर रहे हैं। 

ग्राम पचोखर निवासी सत्यनारायण त्रिपाठी के जिस पुत्र नकुल की मौत हुई है। वह गांव के प्राइमरी विद्यालय में पढ़ता था। गले में दर्द व बुखार होने पर स्वजन इलाज कराने निजी अस्पताल ले गए। जहां जांच में डिप्थीरिया के लक्षण होना बताए गए थे। प्रयागराज में बच्चे की गुरुवार को मौत होने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग की नींद नहीं टूटी है।

ग्रामीण बोले- सफाई और छिड़काव नहीं कराया गया

मौत की जानकारी मिलने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में डोर टू डोर सर्वे और वहां के मरीजों के उपचार के लिए नहीं पहुंची। गांव के रमेश,संतोष,पूर्व प्रधान लवकुश त्रिपाठी ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीम पिछले शुक्रवार, मंगलवार व बुधवार को गांव के स्कूलों में आई थी। जहां बच्चों का टीकाकरण किया था। जबकि टीम को घर घर पहुंचकर जांच व टीकाकरण करन चाहिए। लेकिन अभी तक वहां ऐसा कुछ नहीं हुआ है। सफाई व दवा का छिड़काव आदि भी नहीं कराया गया है। 

प्रभारी ने कही टीकाकरण की बात

वहीं इस संबंध में बहेरी सीएचसी प्रभारी डा. देव तिवारी ने बताया कि डिप्थीरिया मरीज मिलने के बाद गांव में स्वास्थ्य टीम को भेज मरीज के मुहल्ले व सभी स्कूलों में सात से पंद्रह आयु के बच्चों का टीकाकरण कराया जा चुका है। शनिवार को टीम को फिर भेजकर बृह्द टीकाकरण अभियान चलाया जाएगा।

Edited By: Shivam Yadav