बांदा, जागरण संवाददाता। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) प्रांतीय खंड में निर्माण के कामों में फर्जी रायल्टी लगाकर लाखों रुपये का भुगतान कराने का मामला सामने आया है। जनपद में सामग्री लेकर ट्रक आए ही नहीं और उनकी रायल्टी खनिज विभाग के पोर्टल में डालकर सत्यापन कर दिया। तत्कालीन एक्सईएन ने इसमें लाखों का भुगतान करा लिया। इससे खनिज विभाग को लाखों के राजस्व की क्षति हुई है। 

शिकायत पर मंडलायुक्त ने डीएम को जांच के आदेश दिए। डीएम ने सीडीओ की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर सप्ताह भर में जांच रिपोर्ट मांगी है। यहां तैनात रहे अधिशासी अभियंता सुमंत कुमार के तबादले के बाद उनके भ्रष्टाचार की पोल परत दर परत खुल रही है। 

रायल्टी में जमकर फर्जीवाड़ा

पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष सुशील कुमार त्रिवेदी ने 16 अगस्त को मामले की शिकायत मंडलायुक्त आरपी सिंह से की। उनका कहना था कि जनपद में प्रांतीय खंड की ओर से करोड़ों रुपये की लागत से कई सड़कों का निर्माण कराया गया है। इसमें रायल्टी में जमकर फर्जीवाड़ा किया गया है। 

एक्सईएन पर लगे आरोप

विभाग में तैनात सहायक अभियंता ने एक्सईएन की शह पर श्रावस्ती के ट्रांसपोर्टर व सप्लायर की फर्जी रायल्टी लगाकर 99 लाख रुपये से ज्यादा का भुगतान करा लिया। शासन से स्पष्ट निर्देश हैं कि पीडब्ल्यूडी के कार्य में प्रयुक्त होने वाली खनिज सामग्री की खरीद जनपद के ही ठेकेदार से कराई जाए। 

एक्सईएन ने इसके विपरीत श्रावस्ती के चोपड़ा ट्रेडर्स के ट्रकों की रायल्टी खनिज विभाग के पोर्टल में डालकर एई के माध्यम से उसका सत्यापन करा लिया। जबकि यह गाड़ियां जनपद में आई ही नहीं। फर्जी रायल्टी लगाने की जानकारी हुई तो चोपड़ा ट्रेडर्स के मालिक ने छह सितंबर को इसकी शिकायत एक्सईएन से की। कहा कि उनकी गाड़ियों का आना जाना खन्ना, महोबा के रास्ते से कानपुर होते हुए श्रावस्ती होता है। 

उन्होंने टोल टैक्स की रसीद भी पेश की। 14 ट्रकों की फर्जी रायल्टी लगाने से खनिज विभाग को करीब एक करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान है। क्योंकि रायल्टी का छह गुना पैसा खनिज विभाग में जमा होता। 

सप्ताह भर में मांगी जांच आख्या

उधर, छात्र नेता की शिकायत पर मंडलायुक्त ने जिलाधिकारी को मामले की जांच कराने के आदेश दिए हैं। डीएम अनुराग पटेल ने सीडीओ वेद प्रकाश मौर्या, मुख्य कोषाधिकारी विनोद कुमार, जिला खनिज अधिकारी अर्जुन कुमार की तीन सदस्यीय टीम गठित की है। सप्ताह भर में जांच आख्या मांगी है। 

मुख्य कोषाधिकारी विनोद बाबू ने कहा, डीएम ने पीडब्ल्यूडी में फर्जी रायल्टी लगाकर लाखों का भुगतान करने के मामले में जांच टीम गठित की है। जांच के लिए पीडब्ल्यूडी से तीन दिन के अंदर अभिलेख मांगे गए थे, लेकिन अभी तक नहीं दिए गए। रिमाइंडर भेजा जा रहा है।

जिला खनिज अधिकारी अर्जुन कुमार ने कहा, फर्जी रायल्टी का मामला सामने आया है। जांच के बाद ही पता चलेगा कि पोर्टल में दूसरे जिलों की रायल्टी लगाकर क्यों भुगतान कराया गया है। जांच के बाद ही इस मामले में कुछ बताया जा सकता है।

प्रांतीय खंड पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता राजाराम मथुरिया ने कहा, पोर्टल में रायल्टी वैलिड शो कर रही थी। रायल्टी ठेकेदार ही लगाते हैं। किसी ठेकेदार ने किसी की रायल्टी लगा दी, इसमें विभाग की क्या गलती है। फिलहाल ठेकेदारों को नोटिस दी गई और जवाब मांगा गया है।

Edited By: Shivam Yadav