बांदा, जागरण संवाददाता। बुखार के साथ डायरिया भी अपना असर दिखा रहा है। डायरिया की चपेट में आए वृद्ध की मौत हो गई। इसके अलावा 14 मरीज और भर्ती कराए गए हैं। उनका उपचार चल रहा है। 

दरअसल, बारिश के मौसम में संक्रामक व मौसमी बीमारियों से लोग पीड़ित हो रहे हैं। जिसमें वायरल फीवर, डायरिया, टाइफाइड आदि की लोग चपेट में आ रहे हैं। सुबह से अस्पतालों में भीड़ लगना शुरू होती है तो रात तक तांता लगा रहता है। 

ओपीडी में रोजाना 13 सौ मरीज पहुंच रहे

ओपीडी में रोजाना औसतन छह सौ पुराने व करीब 13 सौ नए मरीजों का चिकित्सक परीक्षण कर रहे हैं। चिकित्सक मामूली पीड़ितों को दवा देकर जाने को कहते हैं जबकि गंभीर मरीजों को भर्ती कर उपचार किया जा रहा है। 

वृद्ध की डायरिया से बिगड़ी थी हालत

मोहल्ला शंकर नगर निवासी 82 वर्षीय केबी प्रसाद को गुरुवार दोपहर डायरिया से हालत बिगड़ने पर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। जांच में चिकित्सकों ने उन्हें डायरिया के साथ शुगर का मरीज होना बताया था।

चिकित्सक बोले- सफाई का रखें ख्याल

उधर अन्य भर्ती मरीजों का चिकित्सकों की देखरेख में उपचार चल रहा है। डा. विनीत सचान ने बताया कि मौसम को देखते हुए खाने-पीने में विशेष सावधानी रखने के साथ मच्छरों को काटने से बचाव करना चाहिए। सफाई का भी ख्याल रखें।

फाइलेरिया का समय पर उपचार कराएं तो रुक सकती है बीमारी

पाथ इंडिया प्रदेश इकाई के सहयोग से रानी दुर्गावती मेडिकल कालेज में लिम्फैटिक फाइलेरियेसिस विषय पर कार्यशाला आयोजित की गई। जिसमें करीब 65 डाक्टर, लैब टेक्नीशियन समेत अन्य अलग-अलग कर्मचारियों ने हिस्सा लिया। बीमारी की भयावहता की जानकारी दी गई। 

बताया कि समय पर उपचार कराने से फाइलेरिया बीमारी को आगे बढ़ने से रोका जा सकता है। कार्यक्रम का उद्घाटन मेडिकल कालेज के प्राचार्य डा. मुकेश यादव व मुख्य चिकित्साधिकारी डा. अनिल कुमार श्रीवास्तव ने किया। डाक्टरों ने बताया कि फाइलेरियेसिस जिसे आम बोलचाल की भाषा में हाथीपांव बीमारी कहा जाता है। इसके शुरुआती लक्षण मिलने पर ध्यान दें। इससे बीमारी बड़ा रूप नहीं ले पाती है।

Edited By: sujit dixit

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