बांदा, जागरण संवाददाता : एतिहासिक कालिंजर दुर्ग व आसपास के इलाके को सरकार ने पर्यटन के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है। निश्चित ही सरकार के इस निर्णय से जहां क्षेत्र का पिछड़ापन दूर होगा वहीं लोगों को रोजगार के भी अवसर मिलेंगे।

जिला मुख्यालय से करीब 60 किमी. दूर स्थित कालिंजर दुर्ग जनपद व मध्यप्रदेश की सीमा के पास स्थित है। दुर्ग को पर्यटन के रूप में विकसित करने के लिए पिछले काफी दिनों से मांग चल रही है। दुर्ग के धार्मिक व ऐतिहासिक महत्व के स्थलों तथा प्राकृतिक रमणीयता को देखने के लिए जनपद ही नहीं प्रदेश के बाहरी हिस्सों के पर्यटक भी पहुंचते हैं। दुर्ग में भगवान नीलकंठ का भव्य स्थल है। साथ ही बड़ी संख्या में ऐतिहासिक इमारतें बनी हैं। किले तक पहुंचने के लिए काफी पहले मार्ग का निर्माण कराया जा चुका है। लेकिन अभी भी विकास के बहुत से कार्य कराया जाना शेष है। प्रदेश सरकार द्वारा पावन तीर्थ चित्रकूट के साथ ही ऐतिहासिक कालिंजर किले को विकसित करने का निर्णय लिया गया है। इस निर्णय पर लोगों ने खुशी जताते हुए प्रदेश सरकार व मुख्यमंत्री की सराहना की है। दुर्ग के साथ ही आसपास के क्षेत्र को पर्यटन के रूप में विकसित करने की सरकार ने घोषणा की है। लोगों का कहना है कि दुर्ग व आसपास के क्षेत्र को पर्यटन के रूप में विकसित किये जाने से जहां कालिंजर में पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी वहीं रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। साथ ही क्षेत्र के विकास को भी बढ़ावा मिलेगा। नरैनी के उमाकांत का कहना है कि कालिंजर व आसपास के इलाके को पर्यटन के रूप में विकसित किये जाने की सरकार की घोषणा सराहनीय पहल है। पर्यटन के रूप में विकसित किये जाने के बाद क्षेत्र के विकास के रास्ते खुल जायेंगे।

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