जागरण संवाददाता, बांदा :

सब पढ़ें - सब पढ़ें का नारा बेसिक शिक्षा विभाग वर्षों से लगा रहा है। शासन की यह मंशा धरातल पर कितना परवान चढ़ रही है, इसकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। जिन किताबों को शिक्षण सत्र शुरुआत में ही बच्चों के हाथों पर होनी चाहिए थी। वह किताबें अभी तक विभाग के स्टोर रुम से लेकर ब्लाकों में धूल फांक रही हैं। ये ही नहीं कक्षा 4-5 रेनबो व कक्षा की महान व्यक्तित्व की किताबें अभी तक आई ही नहीं हैं। शिक्षण सत्र शुरू हुए पांच माह बीतने को हैं और अभी भी नैनिहाल किताबों की राह ताक रहे हैं। ऐसी स्थित में परिषदीय विद्यालयों में शिक्षा की गुणवता को लेकर सवाल करना लाजमी है।

वैसे तो जिले में 1365 प्राथमिक व 914 जूनियर विद्यालय में तकरीबन दो लाख 37 हजार 506 कुल छात्रों का पंजीयन हैं। जिसमें से एक लाख 19 हजार 603 बालक और एक लाख 17 हजार 903 बालिकाएं हैं। जिनकों 12 लाख किताबें वितरित होनी हैं। यह किताबें वैसे तो अप्रैल माह में शिक्षण-सत्र की शुरूआत में ही बच्चों को मिल जानी चाहिए, ताकि विद्यालयों में शिक्षण कार्य शुरू हो सके। इसके अलावा शासन की मंशा के तहत ही जिले में बेसिक शिक्षा विभाग के 40 विद्यालयों अंग्रेजी माध्यम के संचालित हैं। उनकी भी हालत सामान्य विद्यालयों जैसी ही है। वहां भी बच्चों को अभी तक किताबों का इंतजार बना हुआ है। कक्षा चार व पांच में पढ़ाई जाने वाली रेनबो और कक्षा छह की महान व्यक्तित्व की किताबें अभी तक ¨प्रट होकर आई ही नहीं हैं।

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भेजी जा रही हैं किताबें

बांदा : बेसिक शिक्षा अधिकारी हरिश्चंद्र नाथ ने बताया कि जैसे-जैसे किताबें आ रही हैं, वैसे ही ब्लाकों को आवंटित की जा रही हैं। इसके बाद ब्लाक से विद्यालय वार किताबें विद्यालय को बांटी जाएंगी। काफी जगहों पर किताबें पहुंच गई हैं। जहां नहीं पहुंची हैं वहां जल्द से जल्द किताबें पहुंचाई जाएंगी।

Posted By: Jagran