जासं, बलरामपुर : जिले में गेहूं खरीद 55 क्रय केंद्रों पर चलने का दावा अधिकारी कर रहे हैं। अपनी उपज बेचने के लिए 2200 किसानों ने पंजीकरण कराया है। किसी तरह संघर्ष कर गेहूं बेचने के बाद अब किसान भुगतान के लिए दौड़ लगा रहे हैं। इस लिए खरीद सुस्त चल रही है। क्रय केंद्रों पर पांच करोड़ 47 लाख रुपये का गेहूं खरीदा गया है। इसके सापेक्ष चार करोड़ 57 लाख 55 हजार रुपये भुगतान मिला है। किसानों का 89 लाख 55 हजार रुपये फंसा हुआ है। वजह, खसरा खतौनी सत्यापन के बाद बैंक खाते का आनलाइन न जुड़ना है। क्रय केंद्रों के बाद अन्नदाता बैंकों में धक्का खाने का मजबूर हैं।

तुलसीपुर बनगाई के संजय सिंह व कटराशंकर नगर के मंजूर अहमद का कहना है कि केंद्र पर उपज बेचने के लिए सत्यापन जरूरी है। नाम और खतौनी का सत्यापन कराने के लिए तहसील में लाइन लगाने के बाद भी वसूली की जाती है। उसके बाद तौल होती है। सिसई के हरिनाम सिंह, महादेवमिश्र के श्याम नारायन, बेनीजोत के जगदंबा प्रसाद ने बताया कि केंद्र पर पंजीकरण के हिसाब से गेहूं की खरीद की जाती है। पंजीकरण कराने के बाद किसानों को तौल कराने के लिए नंबर दिया जाता है। उसके लिए कई दिन तक केंद्र का चक्कर लगाना पड़ता है। मदारा के अमर प्रताप सिंह, खैरहानिया की सविता राव व सोनार के रामदेव ने बताया कि किसी तरह केंद्र पर गेहूं की बिक्री कर दी, लेकिन भुगतान के लिए दौड़ना पड़ता है। इसीलिए किसान आढ़तियों के हाथों गांव में ही उपज बेच देते हैं।

निर्यात बंद होने का नहीं असर :

निर्यात बंद होने से क्रय केंद्रों पर खरीद तेज होने की उम्मीद थी, लेकिन उसका असर अब तक नहीं दिखा है। अधिकांश किसानों ने उपज पहले ही बेच दी है। केंद्र पर कृषकों की आवक कम है। खरीदे गए गेहूं का भुगतान किया जा रहा है। पंजीकरण कराने वाले किसानों को तौल में किसी तरह की परेशानी नहीं होने दी जा रही है।

- नरेंद्र तिवारी, ,खाद्य विपणन अधिकारी

Edited By: Jagran