बलरामपुर : तराई क्षेत्र के गांवों में पहाड़ी नालों की बाढ़ निकलने के बाद संक्रामक बीमारियों ने दस्तक देनी शुरू कर दी है। गांवों में दवा का छिड़काव व वितरण नहीं कराया गया। जिससे गंदगी व दूषित पानी पीने से लोग बीमारियों की गिरफ्त में आने लगे हैं। तराई क्षेत्र के भुसैलिया के मजरे भौरही में करीब 20 लोग संक्रामक बीमारियों से पीड़ित हैं। बावजूद इसके गांव में स्वास्थ्य टीम अब तक नहीं पहुंच सकी। वहीं गौरा चौराहा क्षेत्र के थरुवा-थरुनिया समेत अन्य गांवों में बाढ़ के बाद संक्रामक बीमारी फैलने का खतरा बढ़ गया है।

भौरही में 20 लोग बीमारी की चपेट में :

हरैया सतघरवा : बाढ़ प्रभावित गांव भुसैलिया के मजरे भौरही में बाढ़ का पानी खत्म होने के बाद संक्रामक बीमारियों ने पांव पसारना शुरू कर दिया है। गांव में सर्दी, जुकाम, बुखार से कन्हैयालाल तिवारी (60), सुशीला (58), संदीप तिवारी (30), ननके कश्यप (36), मंगल (60), नानमून (70), कन्हैयालाल (38), तीरथ (45), हरीराम (56), राजे (72), सनेही (68), बड़का (56), संतदयाल (50) समेत 20 लोग बीमार हैं। दीनबंधु तिवारी व अजय कुमार ने बताया कि भौरही, भुसैलिया, लखनीपुर बाढ़ प्रभावित गांव हैं। बाढ़ खत्म होने के बाद दवाओं का छिड़काव कराया गया और न ही स्वास्थ्य टीम गांव में पहुंची है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अधीक्षक डॉ. प्रणव पांडेय ने बताया कि जल्द ही गांव में टीम भेजकर दवाएं वितरित की जाएंगी। झोलाझाप से इलाज कराना मजबूरी :

-गौरा चौराहा : क्षेत्र के थरुवा-थरुनिया गांव निवासी राजकुमार, रामशंकर, सुनीता का कहना है कि बाढ़ का पानी गांव व घरों में घुस आता है। जिससे संक्रामक बीमारियां फैल जाती है। गांव में कोई भी स्वास्थ्यकर्मी नहीं आता है। जिससे झोलाछाप से इलाज कराना मजबूरी है। बताया कि इस समय गांव में बुखार व पेट की बीमारी तेजी से फैल रही है।

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