बलरामपुर: जागरूकता की कमी कहें या जिद, लेकिन यह सच है कि टीकाकरण का विरोध तीसरी लहर का खतरा बढ़ा रहा है। स्वास्थ्य टीमों को कहीं खदेड़ा जा रहा है, तो कहीं उनसे अभद्रता की जा रही है। भले ही कुछ लोग वैक्सीन नहीं लगवा रहे हैं, लेकिन भविष्य में इसका खामियाजा सबको भुगतना पड़ सकता है।

कारण सरकार जुलाई तक सबको टीका लगाकर बच्चों को वैक्सीन लगाने की तैयारी में है। ऐसे में जब अभिभावकों को टीका नहीं लग पाएगा, तो फिर बच्चों के लिए तैयारी धरी रह जाएगी। यही नहीं तीसरी लहर में वैक्सीन न लगने के कारण अभिभावक खुद ही संक्रमित रहेंगे या फिर संक्रमण के डर से बाहर नहीं निकलेंगे तो स्थिति और गंभीर हो जाएगी। टीकाकरण की सुस्त रफ्तार को लेकर स्वास्थ्य विभाग परेशान है। क्योंकि अब वैक्सीन की बर्बादी बंद करने के लिए जिलों का कोटा तय होने जा रहा है। जो जिला जितना वैक्सीन लगवाएगा, उसी के अनुपात में सरकार टीका देगी। जब आई वैक्सीन ही बची रहेगी तो फिर टीके की नई खेप कम हो जाएगी। इससे पूरा अभियान धीमा पड़ सकता है।

बच्चों का भी रूटीन टीकाकरण हो रहा प्रभावित:

- यही नहीं कोरोना टीका के विरोध के चलते बच्चों का टीकाकरण भी प्रभावित हो रहा है। कारण ग्रामीण स्वास्थ्य कर्मियों को देखते ही दूरी बना लेते हैं। सूत्रों की मानें 59 हजार बच्चे ऐसे हैं जिन्हें रूटीन टीके नहीं लग पाए हैं। इन गांवों में एएनएम को देखते ही ग्रामीण बच्चों को बाहर नहीं निकल दे रहे हैं। इससे पहले के प्रतिरोधी परिवारों को भी बल मिल रहा है।

जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डा. अरुण कुमार वर्मा का कहना है कि कोरेाना टीकाकरण अतिरिक्त सत्र है, इससे रूटीन टीकाकरण पर कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा है। हां यदि कोरोना के टीकाकरण की रफ्तार नहीं तेज हुई तो फिर भविष्य में मिलने वाली वैक्सीन का कोटा घट सकता है जो अभियान को और धीमा कर देगा।

Edited By: Jagran